'जब मैं फंसा था तब कोई नेता, कोई संगठन, कोई पद काम नहीं आया… सिर्फ परिवार साथ खड़ा रहा.' ये शब्द हैं बलिया के रहने वाले राज सिंह के, जिन्हें पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में गिरफ्तार किया गया था. कई दिनों तक पूछताछ, हिरासत और दबाव झेलने के बाद आखिरकार CBI जांच में खुलासा हुआ कि एजेंसियों ने गलत व्यक्ति को पकड़ लिया था. इसके बाद राज सिंह को छोड़ दिया गया.
रिहाई के बाद जब राज सिंह अपनी मां से मिले तो दोनों भावुक हो गए. मां ने बेटे को गले लगाया और दोनों की आंखों से आंसू बह निकले. इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज सिंह ने आजतक से अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने दावा किया कि अगर CCTV फुटेज और सबूत नहीं होते तो शायद वह आज जिंदा नहीं होते.
बुरे वक्त में कोई काम नहीं आता
पूरे घटनाक्रम के दौरान सबसे ज्यादा तकलीफ किस बात की हुई? इस सवाल पर राज सिंह भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि मैं अखिल भारत क्षेत्रीय महासभा का प्रदेश महासचिव हूं. लेकिन जब मैं फंसा था तब कोई नहीं आया. सिर्फ परिवार साथ खड़ा रहा. राज सिंह ने कहा कि बड़े-बड़े पद और संगठन सिर्फ दिखावे के लिए होते हैं. असली साथ वही लोग देते हैं जो अपने होते हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि अब उन्हें नहीं लगता कि संगठन में उनका पद बरकरार रहेगा. ऊपर बोर्ड लगा है प्रदेश महासचिव का… लेकिन मुझे नहीं लगता कि अब उसका कोई मतलब है. ये सब बस लाइमलाइट के लिए होता है.
इस्तीफे के संकेत भी दिए
राज सिंह ने बातचीत में यह भी संकेत दिए कि वह क्षेत्रीय महासभा के पद से इस्तीफा दे सकते हैं. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि अंतिम फैसला आगे लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि जब मुश्किल वक्त था तब कोई नहीं आया. ऐसे पद का क्या मतलब जहां आपके अपने ही साथ न खड़े हों. रिहाई के बाद जब राज सिंह अपने घर पहुंचे तो सबसे भावुक पल मां से मुलाकात का था. मां ने बेटे को गले से लगाया और दोनों रो पड़े. राज सिंह ने कहा कि मां का आशीर्वाद था तभी आज जिंदा हूं. मुझे भरोसा था कि मेरी मां के आंसू बेकार नहीं जाएंगे.” उन्होंने राम मंदिर दर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि वह खुद भगवान राम के भक्त हैं और उन्हें विश्वास था कि सच सामने जरूर आएगा.
राम मंदिर दर्शन कर लौट रहा था, तभी उठा लिया
राज सिंह ने बताया कि वह अपने परिवार और मां के साथ अयोध्या में रामलला के दर्शन करने गए थे. दर्शन के बाद परिवार बलिया लौट रहा था. रास्ते में एक ढाबे पर खाना खाने के लिए रुके थे. राज सिंह के मुताबिक तभी अचानक SOG टीम वहां पहुंची और उन्हें हिरासत में ले लिया. उन्होंने कहा, मैं समझ ही नहीं पाया कि आखिर मामला क्या है. अचानक मुझे पकड़ लिया गया. बाद में पता चला कि मुझे शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ हत्या मामले में आरोपी माना जा रहा है. राज सिंह का कहना है कि गिरफ्तारी के वक्त किसी तरह की संतोषजनक जांच नहीं की गई. सिर्फ नाम और शक के आधार पर कार्रवाई कर दी गई.
बार-बार कहा जा रहा था- बोलो तुमने ही किया है
राज सिंह ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन पर लगातार दबाव बनाया गया. उन्होंने कहा, मुझसे कहा जा रहा था कि मान लो तुमने किया है. लगातार प्रेशर बनाया गया. डराया गया कि सच नहीं बोलोगे तो एनकाउंटर कर देंगे. लेकिन जब मैं निर्दोष था तो मैं क्यों झुकता? राज सिंह ने दावा किया कि उनसे बार-बार कबूलनामा लेने की कोशिश हुई. उन्होंने एजेंसियों से कहा कि उनका मोबाइल, लोकेशन, रिकॉर्ड सब चेक कर लिया जाए. उनका कहना है कि अगर वह अपराधी होते तो डरते, लेकिन उन्हें भरोसा था कि सच सामने आएगा.
बंगाल ले जाया गया तो लगा कहीं मार न दें
राज सिंह ने बताया कि उन्हें पश्चिम बंगाल ले जाया गया, जहां भाषा और माहौल दोनों उनके लिए बिल्कुल अलग थे. उन्होंने कहा, मुझे बंगाली नहीं आती थी. वहां मुझे ऐसे देखा जा रहा था जैसे मैं कोई बड़ा अपराधी हूं. उस वक्त डर लग रहा था कि कहीं ये लोग मेरा एनकाउंटर न कर दें. राज सिंह ने दावा किया कि लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा था. हालांकि उन्होंने कहा कि बाद में जब मामला CBI के पास पहुंचा तो स्थिति बदल गई.
CBI नहीं आती तो मैं आज जिंदा नहीं होता
राज सिंह ने CBI की भूमिका की खुलकर तारीफ की. उनका कहना है कि अगर जांच केंद्रीय एजेंसी के पास नहीं जाती तो शायद वह कभी घर वापस नहीं लौटते. उन्होंने कहा, अगर CBI नहीं आती तो मेरा एनकाउंटर हो गया होता. मैं ये बात पूरे होश में बोल रहा हूं. बहुत दबाव था. लेकिन CBI ने निष्पक्ष जांच की. राज सिंह के मुताबिक CBI अधिकारियों ने उनके साथ किसी तरह की बदसलूकी नहीं की. उन्होंने जो पूछा, उसका जवाब दिया गया और जांच तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ी. राज सिंह ने कहा कि CBI ने किसी दबाव में आए बिना जांच की और आखिरकार सच सामने आ गया.
CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा सबूत
राज सिंह के अनुसार इस पूरे मामले में CCTV फुटेज और खरीदारी की रसीदें उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बनीं. उन्होंने बताया कि जिस समय हत्या की घटना हुई, उस दौरान वह दूसरे स्थान पर मौजूद थे. उनके पास मॉल की खरीदारी का बिल और फुटेज मौजूद थे. उन्होंने कहा कि अगर मेरे पास CCTV फुटेज नहीं होता तो शायद मैं आज आपके सामने नहीं बैठा होता. यही सबूत मेरे लिए सबसे बड़ा हथियार बना. राज सिंह का दावा है कि परिवार ने भी लगातार आवाज उठाई और CBI जांच की मांग की. उसी का नतीजा रहा कि जांच का रुख बदला.
निर्दोष हो तो सीधे CBI जांच मांगो
राज सिंह ने पूरे मामले के बाद जांच एजेंसियों और सिस्टम पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी कार्रवाई से पहले स्थानीय एजेंसियों को पूरी जांच करनी चाहिए थी. सिर्फ नाम के आधार पर किसी को अपराधी मान लेना बेहद खतरनाक है. उन्होंने कहा कि अगर कोई निर्दोष है तो उसे सीधे CBI जांच की मांग करनी चाहिए. मुझे अब भरोसा हो गया है कि निष्पक्ष जांच वहीं हो सकती है.
अनिल अकेला