उत्तर प्रदेश जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा अब महज नैतिक निर्णय नहीं, बल्कि गंभीर आरोपों और लंबित जांच से जुड़ा बड़ा मामला बनता जा रहा है. उन पर दिव्यांग कोटे के तहत फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी हासिल करने का आरोप है. आरोप लगाने वाले पक्ष का दावा है कि जब इस मामले की जांच को मैनेज नहीं किया जा सका, तब इस्तीफे का रास्ता चुना गया ताकि न जांच हो और न ही किसी तरह की रिकवरी.
परिवार की पृष्ठभूमि और सरकारी सेवाओं से जुड़ाव
आपको बता दें कि प्रशांत कुमार सिंह की पत्नी वीणा सिंह मुंबई एयरपोर्ट पर स्पोर्ट्स कोटे से सिक्योरिटी इंचार्ज (दारोगा) के पद पर तैनात थीं. उन्होंने करीब पांच साल पहले इस्तीफा दे दिया था. दंपति की दो बेटियां हैं, जिनकी उम्र 10 और 15 वर्ष बताई गई है. पत्नी दोनों बेटियों के साथ लखनऊ में रहती हैं. परिवार में पिता त्रिपुरारी सिंह आजमगढ़ बिजली विभाग से बाबू के पद से सेवानिवृत्त हैं. बड़े भाई विश्वजीत सिंह लखनऊ में रहते हैं, जबकि छोटी बहन जया सिंह कुशीनगर के हाटा में तहसीलदार के पद पर तैनात हैं.
भाई-बहन पर एक ही डॉक्टर से फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप
मामले में बड़ा आरोप यह है कि प्रशांत कुमार सिंह और उनकी बहन जया सिंह दोनों पीसीएस अधिकारियों ने एक ही डॉक्टर से अलग-अलग वर्षों (2009 और 2012) में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाए. आरोपकर्ता का दावा है कि दोनों प्रमाण पत्र फर्जी हैं और इस संबंध में दस्तावेज उपलब्ध हैं. बताया गया है कि इस पूरे मामले की जांच दोनों पर बैठी हुई है.
शिकायत, जांच और इस्तीफे का गणित
आरोपकर्ता के अनुसार, 13 अक्टूबर 2025 को राज्य आयुक्त दिव्यांगजन के यहां शिकायत दर्ज कराई गई थी. इसके बाद सीएमओ मऊ को जांच के निर्देश दिए गए. 19 दिसंबर 2025 को सीएमओ ने स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिखकर कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए दिशा-निर्देश मांगे. आरोप है कि शुरुआत से ही जांच को प्रभावित करने की कोशिश होती रही, लेकिन जब इस बार बात नहीं बनी तो इस्तीफे का विकल्प चुना गया. यह भी दावा किया जा रहा है कि प्रशांत सिंह चाहते हैं कि इस्तीफा मंजूर होते ही न जांच आगे बढ़े और न ही किसी तरह की रिकवरी हो.
भाई विश्वजीत सिंह के दावे
प्रशांत सिंह के बड़े भाई विश्वजीत सिंह का कहना है कि प्रशांत की जन्मतिथि 28 अक्टूबर 1978 है और उन्होंने 27 अक्टूबर 2009 को 31 वर्ष की उम्र में सीएमओ मऊ से 40 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवाया. इसी आधार पर 2011 बैच में 4 प्रतिशत दिव्यांग आरक्षण के तहत उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयन हुआ.
राजनीतिक जुड़ाव और पुराना करियर
प्रशांत कुमार सिंह ने आजमगढ़ से एलएलबी करने के बाद छात्र राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई. वे दिवंगत सपा नेता अमर सिंह के करीबी बताए जाते हैं और अमर सिंह द्वारा गठित राष्ट्रीय लोकमंच पार्टी में मऊ के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं. 2010 से 2013 के बीच उन्होंने कोचिंग कक्षाएं भी चलाईं. नौकरी के दौरान यूपी जीएसटी संगठन के चुनाव में भी उन्होंने किस्मत आजमाई थी. जांच के घेरे में मामला फिलहाल यह पूरा प्रकरण आरोपों दस्तावेजों और जांच के बीच है. प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यदि इस्तीफा स्वीकार होता है तो भी लंबित जांच पर क्या असर पड़ेगा यह बड़ा सवाल बना हुआ है. अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां आरोपों की सच्चाई तक कब और कैसे पहुंचती हैं.
मयंक शुक्ला