KGMU की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप, भाकपा ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल आपत्तिजनक पोस्टों से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है. भाकपा ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है. पार्टी ने फर्जी खबरें फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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KGMU को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट (Photo: Screengrab) KGMU को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट (Photo: Screengrab)

सैयद रेहान मुस्तफ़ा

  • लखनऊ ,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:52 PM IST

उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित मेडिकल यूनिवर्सिटी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही आपत्तिजनक पोस्टों ने सियासी माहौल गरमा दिया है. इस मुद्दे पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने सोमवार को कड़ा विरोध दर्ज कराया. भाकपा ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की है.

भाकपा का आरोप है कि कुछ अराजक तत्व सुनियोजित तरीके से KGMU के खिलाफ फर्जी खबरें और भ्रामक टिप्पणियां सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं. पार्टी का कहना है कि इससे देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा रहा है. भाकपा ने आरोप लगाया कि इसके पीछे एक राजनीतिक एजेंडा काम कर रहा है और विश्वविद्यालय परिसर में जानबूझकर अशांति फैलाने की कोशिश की जा रही है.

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ज्ञापन में कहा गया है कि KGMU को लेकर लगाए गए आरोपों की विशाखा समिति ने कोई पुष्टि नहीं की है. इसके बावजूद अफवाहों को फैलाया जा रहा है और सोशल मीडिया पर लगातार गलत जानकारी साझा की जा रही है. भाकपा ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि कुलपति के चैंबर तक में अराजक और कानून विरोधी गतिविधियां सामने आई हैं.

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाकपा राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों की गरिमा को गिराने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

भाकपा ने राष्ट्रपति से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण में उच्चस्तरीय हस्तक्षेप किया जाए और KGMU की छवि को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. पार्टी ने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इसका असर देश के शैक्षणिक और चिकित्सा संस्थानों की साख पर पड़ेगा.

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