KGMU में फर्जी डॉक्टर का खेल: मेडिकल कैंप के नाम पर छात्राओं को फंसा रहा था, धर्मांतरण रैकेट से जुड़े तार

लखनऊ के KGMU में चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां खुद को डॉक्टर बताने वाला 12वीं पास युवक मेडिकल कैंप और फर्जी कॉन्फ्रेंस के नाम पर छात्राओं को जाल में फंसा रहा था. जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क के तार धर्मांतरण और शोषण से जुड़े हो सकते हैं, जिसके बाद प्रशासन और पुलिस दोनों अलर्ट मोड में आ गए हैं.

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केजीएमयू प्रशासन ने जालसाज हस्साम अहमद को पकड़कर पुलिस के हवाले किया. (Photo: Representational) केजीएमयू प्रशासन ने जालसाज हस्साम अहमद को पकड़कर पुलिस के हवाले किया. (Photo: Representational)

संतोष शर्मा

  • लखनऊ,
  • 22 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:33 PM IST

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में एक बार फिर बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने पूरे परिसर में हड़कंप मचा दिया है. डॉ. रमीज अहमद की गिरफ्तारी के बाद अब एक और संदिग्ध रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें लड़कियों को टारगेट करने और धर्मांतरण से जुड़े तार सामने आ रहे हैं.

केजीएमयू प्रशासन ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो खुद को डॉक्टर बताकर छात्रों को गुमराह कर रहा था, जबकि वह महज 12वीं पास निकला. आरोपी की पहचान हस्साम अहमद के रूप में हुई है, जो कार्डियो सेवा संस्थान नाम की एक फर्जी संस्था चलाकर मेडिकल छात्रों, खासकर लड़कियों को फंसा रहा था.

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रमीज अहमद के रैकेट के सामने आने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने एक विशेष कमेटी गठित की थी, जो छात्रों के बीच संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही थी. इसी कमेटी को सूचना मिली कि हस्साम अहमद नाम का व्यक्ति मेडिकल कैंप के बहाने केजीएमयू की छात्राओं को मुस्लिम बहुल इलाकों में ले जा रहा है.

19 अप्रैल को एक ऐसे ही कैंप की जानकारी मिलने पर केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डीन और प्रवक्ता डॉ. केके सिंह खुद मौके पर पहुंचे. वहां करीब 50 युवक-युवतियां मौजूद थे, जिनमें से 10 छात्र केजीएमयू के निकले, जिनमें कई लड़कियां भी शामिल थीं.

जब छात्रों से पूछताछ की गई तो पता चला कि हस्साम अहमद उन्हें दिल्ली के एम्स में होने वाली कार्डियो सर्जरी की एक बड़ी कॉन्फ्रेंस में ले जाने का झांसा दे रहा था. इस पर केजीएमयू प्रशासन ने जब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से संपर्क किया, तो खुलासा हुआ कि ऐसी कोई कॉन्फ्रेंस आयोजित ही नहीं हो रही है.

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यह भी पढ़ें: केजीएमयू धर्मांतरण मामले में कार्रवाई तेज, आरोपी डॉ. रमीज पर University लेगी ये एक्शन

इतना ही नहीं, छात्रों को दिए गए लेटर में हस्साम अहमद ने खुद को डॉक्टर बताया था और केजीएमयू प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर भी लगाए गए थे, जिनमें डॉ. केके सिंह के सिग्नेचर भी शामिल थे.

पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए केजीएमयू प्रशासन ने तत्काल एक्शन लेते हुए आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया. पुलिस ने उसे अरेस्ट कर जेल भेज दिया है और मामले की जांच जारी है.

जांच में यह भी सामने आया है कि इस फर्जी नेटवर्क से जुड़ा एक और नाम फईक अहमद मंसूरी का है, जिसने हाल ही में केजीएमयू से कार्डियो सर्जरी टेक्नीशियन की परीक्षा दी है. फईक इस फर्जी संस्था कार्डियो सेवा संस्थान का फाउंडर है, जबकि हस्साम अहमद खुद को इसका को-फाउंडर बताता था.

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बातचीत में कहा कि इस पूरे मामले के तार धर्मांतरण रैकेट और लड़कियों के शोषण से जुड़ते नजर आ रहे हैं. ऐसे गिरोह पहले लड़कियों को निशाना बनाते हैं और फिर उन्हें बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसाते हैं. फिलहाल इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है.

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