कासगंज के अमांपुर कस्बे में बीते कुछ दिनों से एक घर के बाहर अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था. न दरवाजा खुल रहा था, न अंदर से कोई हलचल दिख रही थी. पड़ोसियों को लगा कि शायद परिवार कहीं बाहर गया होगा, लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीतता गया, शक गहराता गया. करीब 72 घंटे बाद जब इस खामोशी का सच सामने आया, तो पूरा इलाका दहल उठा... एक ही परिवार के पांच लोगों के शव घर के अंदर मिले.
अमांपुर के एटा रोड स्थित किराए के मकान में रहने वाला सत्यवीर सिंह अपने परिवार के साथ सामान्य जिंदगी जी रहा था. वह कस्बे में वेल्डिंग का काम करता था और लोगों के बीच मेहनती और शांत स्वभाव के व्यक्ति के रूप में जाना जाता था. उसके परिवार में पत्नी शीला और तीन मासूम बच्चे थे- दो बेटियां और एक बेटा. सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन 2-3 दिन तक जब सत्यवीर की दुकान नहीं खुली और परिवार घर से बाहर नहीं निकला, तो लोगों को कुछ शक हुआ.
शनिवार को एक ग्राहक जब उनकी दुकान पर पहुंचा और उसे बंद पाया, तो वह सीधे घर पहुंच गया. दरवाजा अंदर से बंद था. काफी देर आवाज लगाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला, तो आसपास के लोगों को बुलाया गया. किसी तरह पीछे के दरवाजे से झांककर देखा गया- और जो दृश्य सामने था, उसने सबको सन्न कर दिया.
अंदर का खौफनाक मंजर
कमरे के अंदर सत्यवीर सिंह का शव फंदे से लटका हुआ था. वहीं, बिस्तर पर उसकी पत्नी और तीनों बच्चों के शव पड़े थे. यह दृश्य इतना भयावह था कि देखने वालों के पैरों तले जमीन खिसक गई. तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और मौके पर अफरा-तफरी मच गई.
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पुलिस टीम ने पहुंचकर दरवाजा तोड़ा और अंदर दाखिल हुई. शुरुआती जांच में यह साफ हुआ कि कमरे के दरवाजे अंदर से बंद थे और जबरन घुसने के कोई निशान नहीं थे. इससे यह आशंका मजबूत हुई कि घटना घर के अंदर ही घटित हुई है.
क्या हुआ उस बंद कमरे में?
शुरुआती जांच में पुलिस ने जो अंदेशा जताया, वह और भी ज्यादा चौंकाने वाला था. माना जा रहा है कि पहले बच्चों को किसी जहरीले पदार्थ के जरिए मौत के घाट उतारा गया. इसके बाद पत्नी की हत्या की गई और अंत में पिता ने खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.
हालांकि, पुलिस इस निष्कर्ष पर पूरी तरह नहीं पहुंची है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. फोरेंसिक टीम ने मौके से कई अहम साक्ष्य जुटाए हैं, जिनकी जांच से घटनाक्रम की सटीक तस्वीर सामने आएगी.
क्या था वो दबाव?
सबसे बड़ा सवाल यही है- आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक व्यक्ति ने इतना भयावह कदम उठा लिया? क्या यह आर्थिक तंगी का मामला था? या फिर पारिवारिक तनाव ने यह रूप ले लिया? फिलहाल इन सवालों के जवाब किसी के पास नहीं हैं.
पड़ोसियों के मुताबिक, परिवार सामान्य था और कभी कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया. बच्चे भी पढ़ाई में ठीक थे और परिवार का माहौल सामान्य दिखता था. यही वजह है कि यह घटना लोगों के लिए और भी ज्यादा चौंकाने वाली है.
पुलिस क्या कह रही है?
मामले की जांच कर रही पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह मामला पारिवारिक त्रासदी का लग रहा है, लेकिन जब तक पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.
पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिवार के रिश्तेदारों व परिचितों से भी पूछताछ की जा रही है. मोबाइल कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है.
एसपी अंकिता शर्मा ने पूरे मामले में क्या कहा?
एसपी अंकिता शर्मा ने कहा कि अमांपुर में लगभग 6:30 बजे पुलिस को सूचना मिली कि यहां दुकान में सत्यवीर, जिसकी उम्र लगभग 50 वर्ष है, वो अपने परिवार सहित यहां रहता था. 2-3 दिन से वो और उसका परिवार बाहर नहीं आया. पुलिस मौके पर आई. उस परिसर में पीछे जाली का दरवाजा है, उस पर एक कपड़ा बंधा हुआ था, उसको फाड़कर जब देखा तो देखा कि अंदर सत्यवीर का शव फंदे पर लटका हुआ है. कुछ और शव बिस्तर पर पड़े थे.
आगे शटर है और पीछे एक दरवाजा... दोनों अंदर से बंद थे. कोई फोर्स एंट्री के साइन नहीं हैं. मौके पर 5 शव बरामद हुए हैं, जिसमें से एक श्यामवीर उर्फ सत्यवीर का है. बाकी उसकी पत्नी और 3 बच्चे हैं. प्रथम दृष्टया लग रहा है कि सत्यवीर के द्वारा ही ये पूरी घटना की गई है. उसके बाद फांसी लगा ली गई है. इसमें आगे भी और इन्वेस्टिगेशन सभी पहलुओं को संज्ञान में लेकर किया जा रहा है.
इलाके में मातम और सवाल
इस घटना के बाद पूरे अमांपुर कस्बे में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है. जिस परिवार को लोग हंसते-खेलते देखते थे, वह अचानक इस तरह खत्म हो गया- यह बात किसी के गले नहीं उतर रही.
लोगों के बीच सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है- अगर कोई परेशानी थी, तो क्या उसका कोई और रास्ता नहीं था? अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी है. लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं अक्सर उन दबावों से जुड़ी होती हैं, जो बाहर से दिखाई नहीं देते- आर्थिक तंगी, कर्ज का बोझ, पारिवारिक तनाव या मानसिक अवसाद... पुलिस इन्हीं सभी पहलुओं को खंगाल रही है. यह उन अनकहे दबावों की कहानी है, जो दिखते नहीं, लेकिन जिंदगी खत्म कर देते हैं.
देवेश पाल सिंह