उत्तर प्रदेश पुलिस के चार जवानों को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. हरियाणा के नूंह में हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले दो दारोगा और दो सिपाहियों के पार्थिव शरीर बुधवार को उरई स्थित पुलिस लाइन पहुंचे, जहां भावुक माहौल में उन्हें अंतिम सलामी दी गई. तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर जैसे ही पहुंचे, पुलिसकर्मियों और मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं.
इस दौरान आलोक सिंह और आकाश कुलहरी ने पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी. श्रद्धांजलि देने वालों में विनय कुमार सिंह, राजेश कुमार पांडेय और डॉ. ईशान सोनी सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहे.
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दरअसल, यह हादसा मंगलवार को उस समय हुआ जब उत्तर प्रदेश पुलिस की टीम अपहरण मामले में दबिश देने के लिए स्कॉर्पियो से हरियाणा गई थी. एक्सप्रेस-वे पर ओवरटेक करने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होकर अन्य वाहन से टकरा गया, जिसमें दारोगा सत्यभान, दारोगा मोहित यादव, सिपाही प्रदीप और सिपाही अशोक सहित कुल पांच लोगों की मौत हो गई.
शोक में डूबा पुलिस परिवार
अंतिम विदाई के दौरान शहीद दारोगा सत्यभान के बेटे मंजीत सिंह और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. अधिकारियों ने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए आश्वस्त किया कि विभाग इस दुख की घड़ी में पूरी तरह उनके साथ खड़ा है.
राजकीय सम्मान और सलामी के बाद पार्थिव शरीरों को उनके पैतृक निवास के लिए रवाना कर दिया गया, जहां पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाएगा. पूरे समारोह के दौरान पुलिस लाइन का माहौल गमगीन बना रहा और जवानों ने अपने साथियों को अंतिम सलामी दी.
मुआवजे और सहायता का ऐलान
डीजी आलोक सिंह ने कहा कि यह पुलिस परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने बताया कि जवानों ने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी है और उनके परिवारों की हर संभव मदद की जाएगी. दुर्घटना बीमा के तहत 1 करोड़ 90 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी. साथ ही परिवार का कोई सदस्य नौकरी करना चाहता है तो उसे नौकरी दी जाएगी.
बेटे ने जताया गर्व और दर्द
दिवंगत दारोगा सत्यभान के बेटे मंजीत सिंह ने बताया कि उनके पिता हमेशा ड्यूटी को सर्वोपरि रखते थे. उन्होंने कहा कि परिवार में तीन भाई और दो बहनें हैं, जिनमें बहनों की शादी हो चुकी है. पिता के जाने से सब कुछ छिन गया है, लेकिन उन्हें गर्व है कि उन्होंने देश सेवा में अपने प्राण न्योछावर किए.
अलीम सिद्दीकी