इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को पूरी तरह सीज करने का एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस कमर हसन रिजवी की पीठ ने मामले की सुनवाई की थी.
यह कड़ी कार्रवाई वार्ड संख्या-73 (फैजुल्लागंज) से नवनिर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को पिछले पांच महीनों से शपथ न दिलाए जाने के कारण की गई है. कोर्ट ने साफ कहा कि मेयर पक्ष हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों जगह से राहत पाने में असफल रहा, इसके बावजूद अदालती आदेश, जिला मजिस्ट्रेट और राज्य सरकार के निर्देशों का पालन नहीं किया गया.
चुनावी विवाद और शपथ में देरी पर कोर्ट सख्त
साल 2023 के नगर निकाय चुनाव में भाजपा के प्रदीप कुमार शुक्ला विजयी घोषित हुए थे, लेकिन हलफनामे में गड़बड़ी के चलते कोर्ट ने दिसंबर 2025 में उनका निर्वाचन रद्द कर सपा समर्थित ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित घोषित किया था. सुप्रीम कोर्ट से भाजपा प्रत्याशी की याचिका खारिज होने के बाद भी पार्षद को शपथ नहीं दिलाई जा रही थी. मामले में सीनियर एडवोकेट गौरव मेहरोत्रा ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा.
अब DM और नगर आयुक्त संभालेंगे नगर निगम की कमान
हाईकोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद नगर निगम प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है. अदालत के निर्देशानुसार, जब तक नए पार्षद ललित किशोर तिवारी को पद की शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक मेयर के पास कोई अधिकार नहीं रहेंगे. इस दौरान लखनऊ नगर निगम के सभी प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की पूरी कमान जिलाधिकारी (DM) और नगर आयुक्त संभालेंगे.
आशीष श्रीवास्तव