गाजियाबाद के राज एम्पायर सोसाइटी निवासी हरीश राणा का अंतिम संस्कार बुधवार सुबह दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में किया गया. 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी में बी.टेक की पढ़ाई के दौरान चौथी मंजिल से गिरने के बाद हरीश कोमा में चले गए थे. 13 साल बाद भी जब उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ तो सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इच्छा मृत्यु के लिए आर्टिफिशियल न्यूट्रिशन (फीडिंग ट्यूब) हटाने यानी पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी थी. मंगलवार को एम्स दिल्ली के पेलिएटिव केयर यूनिट में हरीश का निधन हो गया. छोटे भाई आशीष ने बहन भावना की मौजूदगी में उन्हें मुखाग्नि दी.
नम आंखों से विदाई, पिता बोले- 'बेटे को दर्द से मुक्ति'
अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद गमगीन था. हरीश की मां निर्मला देवी ने हाथ जोड़कर अपने बेटे को भावुक विदाई दी, वहीं पिता अशोक राणा ने सांत्वना देने आए लोगों से न रोने की अपील की. उन्होंने कहा कि उनका बेटा अब एक 'सुखी स्थान' पर है और वह हमेशा एक अच्छा बेटा रहा. पड़ोसियों और शुभचिंतकों ने परिवार के उस अटूट धैर्य की सराहना की, जिसने आर्थिक और भावनात्मक चुनौतियों के बावजूद 13 वर्षों तक हरीश की सेवा की.
नेत्र दान कर दुनिया को दी नई रोशनी
मृत्यु के बाद भी हरीश दूसरों के काम आए. ब्रह्मकुमारी संस्था से जुड़ी सिस्टर लवली ने बताया कि परिवार ने हरीश की आंखें दान करने का फैसला किया है. अंतिम विदाई के समय वैदिक मंत्रोच्चार किया गया और उनके पार्थिव शरीर पर गुलाब की पंखुड़ियां व मालाएं अर्पित की गईं. सिस्टर लवली के अनुसार, आने वाले दिनों में हरीश के लिए 'भोग' और प्रार्थना का आयोजन होगा, जिसमें उनकी पसंद के व्यंजन बनाए जाएंगे, जिन्हें वह एक दशक से नहीं खा सके थे.
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और अंत
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पैसिव यूथेनेशिया के तहत केवल कृत्रिम पोषण हटाया जाएगा, जबकि देखभाल जारी रहेगी ताकि प्राकृतिक और 'गरिमामयी' मृत्यु हो सके. मेडिकल बोर्ड ने हरीश की स्थिति को लाइलाज बताया था. इस दुखद लेकिन आवश्यक निर्णय के बाद हरीश की 13 साल लंबी मेडिकल पीड़ा का शांत अंत हो गया. अंतिम संस्कार में एम्स का स्टाफ, एनजीओ प्रतिनिधि और भारी संख्या में रिश्तेदार शामिल हुए.
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