उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से खनन माफिया की दबंगई का सनसनीखेज मामला सामने आया है. गंगा नदी से रेत खनन को रोकने पहुंचे वन विभाग के दारोगा और चौकीदार पर खनन माफियाओं ने हमला कर दिया. आरोप है कि माफिया ने दोनों कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज करते हुए जमकर मारपीट की, जिससे वे घायल हो गए. घटना के बाद वन दारोगा की शिकायत पर पुलिस ने छह नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
यह मामला गढ़ कोतवाली क्षेत्र के नया बांस-वख्तावरपुर इलाके का है. बीते 19 जनवरी को वन दारोगा जयपाल अपने हमराही मुकेश कुमार त्यागी और वन चौकीदार छत्रपाल के साथ बाइक से वन क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे. इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि नया बांस क्षेत्र में गंगा नदी के किनारे अवैध तरीके से बालू खनन किया जा रहा है.
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके की ओर रवाना हुई, लेकिन रास्ते में नया बांस-वख्तावरपुर गांव के पास खनन माफिया ने उनका रास्ता रोक लिया. आरोप है कि माफिया ने पहले गाली-गलौज की और फिर सरकारी काम में बाधा डालते हुए वन दारोगा और चौकीदार पर हमला कर दिया. इस हमले में दोनों कर्मचारियों को चोटें आईं.
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वन दारोगा जयपाल ने थाने में दी गई तहरीर में कहा कि जिन लोगों ने उनके साथ मारपीट की, उनमें अशोक पुत्र रामकिशन, कपिल पुत्र कलुआ, विपिन पुत्र कालू, खजान पुत्र यादराम, अजय पुत्र रामकिशोर और नन्हें पुत्र करन सिंह शामिल हैं. सभी आरोपी नया बांस-वख्तावरपुर गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं. पीड़ित वन कर्मियों ने इस पूरे मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की है.
घटना को लेकर इंस्पेक्टर ने क्या कहा?
शिकायत के आधार पर गढ़ कोतवाली पुलिस ने सभी छह आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. इस मामले में इंस्पेक्टर देवेंद्र बिष्ट ने बताया कि वन दारोगा और चौकीदार के साथ मारपीट की गई है. केस दर्ज कर लिया गया है. आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाएगी. उत्तर प्रदेश के हापुड़ में गंगा से अवैध तरीके से रेत खनन न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि सरकारी कर्मचारियों की जान को भी खतरे में डाल रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध खनन का यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है और माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे अब सीधे सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने से भी नहीं हिचक रहे. घटना के बाद वन विभाग के कर्मचारियों में रोष है और उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है. वहीं, प्रशासन के लिए यह मामला कानून-व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण, दोनों के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है.
देवेंद्र कुमार शर्मा