B-वारंट के बावजूद गैंगस्टर स्क्रैप माफिया रवि काना की रिहाई, कोर्ट सख्त, बांदा जेल अधीक्षक से जवाब तलब

कुख्यात बदमाश रवि काना को वारंट जारी होने के बावजूद बांदा जेल से रिहा कर दिया गया. इस पर सीजीएम गौतमबुद्ध नगर ने सख्त रुख अपनाते हुए जेलर से जवाब मांगा है और रवि काना की तत्काल गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं. जेलर को 6 फरवरी तक स्पष्टीकरण देना होगा.

Advertisement
गैंगस्टर रवि काना की रिहाई पर कोर्ट सख्त (Photo: ITG) गैंगस्टर रवि काना की रिहाई पर कोर्ट सख्त (Photo: ITG)

अरुण त्यागी

  • ग्रेटर नोएडा ,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:13 PM IST

ग्रेटर नोएडा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां कुख्यात बदमाश रवि काना को जेल से रिहा करना जेल प्रशासन को भारी पड़ गया है. गौतमबुद्ध नगर की अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए बांदा जेल के जेलर से स्पष्टीकरण तलब किया है. कोर्ट ने जेलर को 6 फरवरी तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

Advertisement

जानकारी के अनुसार कुख्यात बदमाश रवि काना के खिलाफ गौतमबुद्ध नगर कोर्ट से पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी थे. इसके बावजूद बांदा जेल प्रशासन ने उसे रिहा कर दिया. जब यह मामला कोर्ट के संज्ञान में आया तो सीजीएम गौतमबुद्ध नगर ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल कार्रवाई के संकेत दिए.

कोर्ट ने जेलर से मांगा स्पष्टीकरण

सीजीएम गौतमबुद्ध नगर ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि कुख्यात बदमाश रवि काना की तत्काल गिरफ्तारी की जाए. साथ ही यह भी कहा गया है कि वारंट जारी होने के बावजूद रिहाई कैसे हुई, इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित जेल अधिकारी की बनती है. इसी को लेकर बांदा जेल के जेलर से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है. रवि काना और उसके गिरोह पर गौतम बुद्ध नगर समेत कई जिलों में दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. वह लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है. कोर्ट के आदेशों के बावजूद उसकी रिहाई ने कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

Advertisement

इस प्रकरण में आरोपी रवि काना को बी-वारंट के जरिए से कोर्ट में तलब किया गया था. विवेचक द्वारा आरोपी की न्यायिक हिरासत से पेशी सुनिश्चित करने और रिमांड स्वीकृत कराने के लिए विधिवत प्रार्थना पत्र भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था. बता दें, बी-वारं को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 267 के तहत जारी किया जाता है, एक वैधानिक प्रक्रिया है. इसके तहत किसी अन्य मामले में जेल में बंद आरोपी या अपराधी को किसी दूसरे प्रकरण में सुनवाई अथवा कार्यवाही के लिए संबंधित न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया जाता है.

6 फरवरी को देना होगा जवाब

इस पूरे मामले के बाद पुलिस और जेल प्रशासन में भी हलचल तेज हो गई है. अब सबकी नजरें जेलर के जवाब और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं. कोर्ट के सख्त रुख के बाद माना जा रहा है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement