गोरखपुर के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित गंगा गैस एजेंसी पर उपभोक्ता घरेलू एलपीजी सिलेंडर पाने के लिए भीषण गर्मी और उमस के बीच रात भर सड़कों पर कतारों में जागकर रातजगा कर रहे हैं. पर्याप्त सप्लाई न होने के कारण पैदा हुई इस किल्लत की वजह से लोग खुले आसमान के नीचे मच्छरदानी लगाकर और सिलेंडरों में ताला बंद कर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. कई दिनों से कतार में लगने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. पत्नियों द्वारा बिना गैस सिलेंडर घर में न घुसने देने और बच्चों के स्कूल की दिक्कतों के कारण लोग इस परेशानी को झेलने पर मजबूर हैं.
'गैस लेकर आओ, तभी मिलेगा खाना'
हांसूपुर के रहने वाले पीड़ित उपभोक्ता राजाराम ने बताया कि हर महीने इसी तरह तीन-चार दिन लाइन लगाने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. वह रात 11 बजे से 200 सिलेंडरों की कतार में लगे हैं. राजाराम के मुताबिक, उनकी पत्नी ने उन्हें घर से भगा दिया है और साफ कह दिया है कि गैस लेकर आओगे तभी खाना मिलेगा. रात भर जागने और सिलेंडर चोरी होने से बचाने के लिए वे लोग हल्का खाना खाकर आ रहे हैं ताकि नींद न आए और बच्चों को सुबह स्कूल जाने में कोई दिक्कत न हो.
बीमार बुजुर्ग महिला अकेले गुजार रही रात
गैस की किल्लत का सामना कर रहे लोग अपने सिलेंडरों में ताला मारकर कतारों में लगे हैं. बेलीपार से आई बुजुर्ग महिला मनभावती देवी शाम 5 बजे से लाइन में खड़ी हैं. उन्होंने बताया कि वह पांच बार लाइन में लग चुकी हैं, लेकिन सिलेंडर नसीब नहीं हुआ. वह पहले अपने पति के साथ आती थीं, लेकिन भीषण गर्मी और उमस के कारण पति की तबीयत खराब हो गई, जिसके चलते अब वह पूरी रात सड़क पर अकेले गुजारने को मजबूर हैं. उनका कहना है कि अमीर लोग यहां नहीं दिखते, सिर्फ गरीब ही परेशान हैं.
चूल्हे के धुएं से आंखों में दर्द, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
प्रशासनिक दावों के विपरीत जमीन पर हालात बेहद खराब हैं. जिला प्रशासन और गैस एजेंसी भले ही जिले में गैस की कोई कमी न होने की बात कह रहे हों, लेकिन महावीर छपरा से आईं बेलमती देवी ने बताया कि वे 6 दिन से लाइन में लग रही हैं. मजबूरी में लकड़ी पर खाना बनाना पड़ रहा है, जिससे आंखों में धुआं लगता है और दर्द होता है. वहीं राधिका ने बताया कि लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने में देरी होती है, जिससे बच्चों को सुबह जल्दी स्कूल जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है.
गजेंद्र त्रिपाठी