मां की गोद में भटकती रही 6 साल की रेप विक्टम..., अस्पताल में 9 घंटे नहीं मिला इलाज

गाजीपुर में 6 साल की नाबालिग पीड़िता को 9 घंटे तक इलाज न मिलने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए. मेडिकल कॉलेज और सीएमओ कार्यालय के बीच तालमेल की कमी के चलते बच्ची अस्पतालों के बीच भटकती रही. मामले ने तूल पकड़ा तो परिजनों और स्थानीय लोगों ने हंगामा कर दिया.

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 6 साल की रेप विक्टम को अस्पताल में 9 घंटे नहीं मिला इलाज (Photo: itg) 6 साल की रेप विक्टम को अस्पताल में 9 घंटे नहीं मिला इलाज (Photo: itg)

विनय कुमार सिंह

  • गाजीपुर,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:51 PM IST

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिला महिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहां 26 मार्च को दिन में 2 बजे 6 साल की नाबालिग रेप पीड़िता को करीब 9 घंटे तक इलाज नहीं मिल सका. दोपहर 2 बजे मेडिकल कॉलेज के जिला महिला अस्पताल पहुंची बच्ची का उपचार रात 11 बजे तक शुरू ही नहीं हो पाया, जिससे परिजनों में आक्रोश फैल गया. इस खबर को सुन लगभग साढ़े 9 बजे रात में स्थानीय लोग और पत्रकार मौके पर पहुंचे.

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अस्पताल और CMO ऑफिस में कॉर्डिनेशन की कमी

मौके पर मौजूद चिकित्साधिकारियों की बातों को सुनकर समझ आया कि मेडिकल कॉलेज और सीएमओ कार्यालय के बीच तालमेल की कमी के कारण पीड़िता को समय पर इलाज नहीं मिल सका. महिला चिकित्सालय के डॉक्टरों ने मेडिको-लीगल प्रक्रिया का हवाला देते हुए बच्ची को जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया, लेकिन वहां भी इलाज शुरू नहीं हुआ. क्योंकि बकौल सीएमओ गाजीपुर ये दोनों अस्पताल चिकित्सा शिक्षा विभाग यानी मेडिकल कॉलेज के अधीन और वो उनके जूरिडिक्शन के बाहर है, लेकिन हंगामा बढ़ता देख उन्होंने तत्काल चिकित्सा का आश्वासन दिया. 

मां की गोद में बिना इलाज भटकती रही पीड़िता

फिर मौके पर जिला महिला अस्पताल की डॉक्टर्स भी आईं. उन्होंने दलील दी कि ये लोग 4 बजे आए. चुंकी मामला पॉक्सो का था इसलिए ट्रॉमा सेंटर मेडिको लीगल के लिए भेजा गया था क्योंकि उसके बगैर इलाज संभव नहीं है. इन सबमें पीड़िता, मां- बाप की गोद में बिना इलाज भटकती रही. उसके बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा सरकारी चिकित्सकों की दलील से और बढ़ गया. महिला अस्पताल के बाहर हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई.

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अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन

घटना से नाराज परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. सूचना मिलने पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने का प्रयास किया. सीएमओ गाजीपुर ने सफाई देते हुए कहा कि संबंधित अस्पताल मेडिकल कॉलेज के अधीन आता है, हालांकि उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि पीड़िता का इलाज सुनिश्चित किया जाएगा. यह घटना एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों और संवेदनहीनता को उजागर करती है, जहां गंभीर मामलों में भी समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है.

वहीं इस मामले में एडिशनल एसपी गाजीपुर का बयान आया उन्होंने बताया पीड़ित और आरोपी दोनों नाबालिग हैं और मामले को दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है.
 

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