बीते दिनों गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों द्वारा बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या की गुत्थी हर पल उलझती जा रही है. एक पिता, दो मां और कुल पांच भाई बहन होने के चलते उलझे हुए रिश्ते और कोरियन गेम की लत वाली थ्योरी को लेकर बारीकी से जांच जारी है. महज 12, 14 और 16 साल की नाबालिग लड़कियों के पिता से बातचीत के लिए एक बार फिर आजतक की टीम पहुंची, लेकिन उन्होंने दरवाजा नहीं खोला. बल्कि उन्होंने जाली वाले दरवाजे के दूसरी ओर से ही कुछ-कुछ बयान दिए.
'ये नहीं पढ़ेंगीं, पहले इनका माइंड चेंज करो'
घटना के दिन से ही लड़कियों पर कोरियन गेम और कोरियन कल्चर के ऑब्सेशन की रट लगाए पिता ने एक बार फिर कहा कि बच्चों ने कोरियन पर्सनैलिटी बनाई थी और अपना नाम बदल दिया था. फोन की डीपी भी कोरियन होती थी, हटा दो तो नाराज हो जाती थीं. बोलती थीं-हम कोरिया जाएंगे, कोरिया ले चलो, इंडियन के नाम से गुस्सा आ जाता था, बच्चे तो इंडिया के नाम पर खाना तक नहीं खाते थे. उन्होंने बताया कि लड़कियां फेल होने पर शर्म के चलते दो सालों से स्कूल नहीं गई थीं लेकिन ट्यूशन जाती थीं. ट्यूशन टीचर कहती थी, ये नहीं पढ़ेंगीं, पहले इनका माइंड चेंज करो.
'कोरिया नहीं गए तो मर जाएंगे'
उन्होंने आगे कहा- हम चाहते हैं कोरियन ड्रामा, वीडियो जो भी चल रहे हैं जिनसे बच्चे एडिक्ट हो रहे हैं वे सभी बन्द होने चाहिए. बच्चे ऐसी चीजें तीन चार साल से देख रहे थे. मेरी बेटियां कहती थीं कि कोरिया नहीं गए तो मर जाएंगे.
बेटियों के साथ आखिरी बात
बेटियों के साथ आखिरी बात को लेकर उन्होंने बताया कि उसी शाम बात हुई थी, मैंने कहा- खाना खा है लिया तो सो जाओ. जवाब में वो बोलीं कि कोरिया जाना है. मैंने पूछा क्या करोगी कोरिया जाकर? शाम 7 बजे उनका मोबाइल ले लिया तो वो 10 बजे दोबारा ले गए. फिर 12 बजे तक मोबाइल देखा. बाद में मेरी पत्नी मोबाइल वापस ले आई. उसके बाद वो कम्बल से निकले मंदिर वाले कमरे में गए अंदर से लॉक किया उसके बाद क्या हुआ हमें नहीं पता, वो लोग नीचे ही गिरे मिले.
सुसाइड नोट में 'सॉरी मम्मी, सॉरी पापा...', लिखकर मौत के गले लगाने वाली बच्चियों के पिता ने पहले ही बताया था कि लड़कियां ऑनलाइन कोरियन गेम खेलने की आदी थीं, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं थी. हालांकि कोरियन गेम वाली थ्योरी को पुलिस अभी तक नकार रही है.
हिमांशु मिश्रा