गाजियाबाद में 12, 14 और 16 साल की तीन नाबालिग बहनों की मौत के मामले में कई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं. इसमें कोरियन आइडेंटिटी, बदले नाम, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल दुनिया में बनाई गई नई पहचान जैसे कई एंगल शामिल हैं. पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि तीनों बहनें लंबे समय से कोरियन कल्चर और विदेशी डिजिटल कंटेंट से प्रभावित थीं. वहीं परिवार का दावा है कि बेटियों की सोच और व्यवहार पिछले कुछ सालों में पूरी तरह बदल गया था.
पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल से सुसाइड नोट और डायरी बरामद की गई है. सुसाइड नोट में एक लाइन लिखी मिली है. 'मार खाने से अच्छा है कि मरना'. हालांकि पुलिस जांच में अब तक मारपीट के कोई निशान सामने नहीं आए हैं. यही वजह है कि पुलिस इस लाइन के पीछे छिपे मानसिक दबाव और घरेलू माहौल की भी जांच कर रही है. पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि क्या यह लाइन किसी हिंसा का संकेत है या फिर मानसिक तनाव और भावनात्मक दबाव का परिणाम.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी केस को नया आधार दिया है. रिपोर्ट में मौत का कारण शॉक एंड हेमरेज एंटी मॉर्टम इंजरी बताया गया है. यानी गिरने से गंभीर चोट और अत्यधिक खून बहने की वजह से मौत हुई. पोस्टमार्टम में शरीर के अन्य हिस्सों पर किसी तरह की अतिरिक्त चोट के निशान नहीं मिले हैं. इससे पता चलता है कि मामला आत्महत्या का ही है, लेकिन सवाल यह बना हुआ है कि तीनों बहनों ने एक साथ यह कदम क्यों उठाया.
मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट की कड़ी
इस केस में सबसे अहम कड़ी मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट को माना जा रहा है. पुलिस के मुताबिक, परिवार के पास पहले दो मोबाइल फोन थे. इनमें से एक फोन 7 से 8 महीने पहले बेच दिया गया था. दूसरा फोन करीब 15 दिन पहले बेचा गया. पुलिस अभी तक इन दोनों फोन को रिकवर नहीं कर पाई है, लेकिन इन्हें ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है. पुलिस को आशंका है कि इन्हीं फोन में वह डिजिटल डेटा मौजूद हो सकता है, जिससे तीनों बहनों की मानसिक स्थिति और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों की असली तस्वीर सामने आ सके.
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पुलिस के मुताबिक, एक फोन मां का था, जिसे बाद में बच्चे इस्तेमाल कर रहे थे. यह फोन फिलहाल पुलिस ने सीज कर लिया है और फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. पुलिस को उम्मीद है कि इस फोन से सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैटिंग, वीडियो हिस्ट्री, सर्च हिस्ट्री और अन्य डिजिटल सबूत मिल सकते हैं.
यह भी सामने आया है कि तीनों बहनों ने सोशल मीडिया पर एक अकाउंट बनाया था, जिसमें फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही थी. करीब 10 दिन पहले पिता को इस अकाउंट की जानकारी मिली. इसके बाद पिता ने वह अकाउंट डिलीट कर दिया और मोबाइल फोन भी छीन लिया. पुलिस इसी एंगल पर यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या अकाउंट डिलीट होना और फोन छीना जाना इस घटना का बड़ा ट्रिगर बना.
सोशल मीडिया पर कोरियन नाम से बनाई थी प्रोफाइल
इस केस में सबसे ज्यादा चर्चा कोरियन आइडेंटिटी को लेकर है. परिवार के मुताबिक, तीनों बहनों ने अपने नाम तक बदल दिए थे. उन्होंने सोशल मीडिया पर कोरियन नाम से प्रोफाइल बनाई थी और खुद को कोरियन पर्सनैलिटी के रूप में दिखाने लगी थीं. पिता का दावा है कि बेटियां भारतीय पहचान से चिढ़ने लगी थीं और उन्हें 'इंडियन नाम' पसंद नहीं था.
पिता ने पुलिस और मीडिया को बताया कि बेटियां लगातार कोरियन ड्रामा, के-पॉप वीडियो और विदेशी कंटेंट देखती थीं. उनका व्यवहार धीरे-धीरे बदलता गया. वे अक्सर कहती थीं कि उन्हें कोरिया जाना है और वे वहीं रहना चाहती हैं. पिता का दावा है कि बेटियां कई बार यह कह चुकी थीं कि अगर कोरिया नहीं मिला तो वे मर जाएंगी.
यह बयान जांच एजेंसियों के लिए अहम बन गया है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि बहनों के मन में कोरिया को लेकर एक अलग ही मानसिक दुनिया बन चुकी थी. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या यह सिर्फ पसंद का मामला था या फिर यह डिजिटल एडिक्शन और पहचान संकट का मामला बन चुका था.
उस रात क्या हुआ, पिता के बयान में क्या है?
पिता के मुताबिक, घटना वाली शाम भी बेटियों के साथ बातचीत हुई थी. उन्होंने बताया कि उन्होंने बेटियों को खाना खाने और सोने के लिए कहा था, लेकिन वे मोबाइल में व्यस्त थीं. पिता का कहना है कि शाम को उन्होंने मोबाइल फोन लिया था, लेकिन रात में बेटियों ने वापस ले लिया. फिर देर रात तक मोबाइल देखा गया और बाद में मां ने फोन वापस लिया.
इसके बाद तीनों बहनें कंबल से निकलकर मंदिर वाले कमरे में चली गईं और अंदर से लॉक कर लिया. पिता का कहना है कि इसके बाद उन्हें कुछ पता नहीं चला. बाद में तीनों बहनें नीचे मृत हालत में मिलीं. पुलिस अब इसी टाइमलाइन को खंगाल रही है और यह समझने की कोशिश कर रही है कि आखिरी कुछ घंटों में ऐसा क्या हुआ जिसने तीनों बहनों को एक साथ यह कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया.
डायरी में क्या लिखा था, क्यों चौंक गई पुलिस?
पुलिस को जो डायरी मिली है, वह इस केस में सबसे महत्वपूर्ण सबूत मानी जा रही है. डायरी में अंग्रेजी में कुछ पंक्तियां लिखी थीं. शुरुआत में लिखा था- 'वी आर लव कोरियन लव लव लव... सॉरी'. इसके बाद लिखा गया कि इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है, वह सच है और इसे पढ़ा जाए.'
डायरी में बहनों ने पिता से माफी मांगते हुए लिखा. 'आई एम रियली सॉरी... सॉरी पापा'. इसके बाद उन्होंने लिखा कि 'लो छुडवाओगे हमसे कोरियन, हमारी जान थी, तुमने हिम्मत कैसे की'. आगे लिखा गया कि 'अब तो यकीन हो गया होगा कि कोरियन और के-पॉप हमारी जान है'.
डायरी में यह भी लिखा गया कि वे कोरियन एक्टर्स और के-पॉप ग्रुप को जितना चाहती थीं, उतना अपने घर वालों को भी नहीं चाहती थीं. इन लाइनों ने जांचकर्ताओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि तीनों बहनों का भावनात्मक जुड़ाव किस स्तर तक पहुंच चुका था.
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डायरी में एक लंबी सूची भी दी गई है, जिसमें उन्होंने अपनी पसंदीदा चीजों को नंबरिंग में लिखा. सबसे ऊपर कोरियन एक्टर्स, के-पॉप ग्रुप, कोरियन मूवीज और कोरियन बीएल ड्रामा का जिक्र था. इसके बाद चाइना, थाईलैंड, जापान और अमेरिका से जुड़े कंटेंट की बातें थीं. डायरी में कई गेम्स और कार्टून का भी जिक्र है.
यह लिस्ट दिखाती है कि तीनों बहनें लगातार डिजिटल और फैंटेसी कंटेंट में डूबी हुई थीं. पुलिस इसी आधार पर यह जांच कर रही है कि क्या यह मामला डिजिटल एडिक्शन और मानसिक असंतुलन से जुड़ा है.
परिवार के अंदर तनाव और 'मार' वाली लाइन का मतलब
सुसाइड नोट में लिखी लाइन 'मार खाने से अच्छा है कि मरना' अब सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है. पुलिस को पोस्टमार्टम में मारपीट के कोई निशान नहीं मिले हैं. इसलिए जांच एजेंसियां इसे शारीरिक हिंसा से ज्यादा मानसिक दबाव या भावनात्मक तनाव के रूप में देख रही हैं.
परिवार के मुताबिक, पिता ने कई बार बेटियों को समझाने की कोशिश की थी. पिता का कहना है कि उन्होंने गुस्से में कुछ बार डांटा भी था, क्योंकि बेटियां पढ़ाई की जगह लगातार कोरियन वीडियो देखती थीं. पिता का दावा है कि जब मोबाइल से उनकी प्रोफाइल फोटो या नाम हटाया जाता था तो बेटियां खाना तक नहीं खाती थीं.
आर्थिक तंगी और फोन बेचने की कहानी
इस केस में आर्थिक एंगल भी सामने आया है. पुलिस के मुताबिक, पिता शेयर ट्रेडिंग का काम करते थे और पिछले कुछ समय से उसकी आर्थिक स्थिति खराब थी. बताया जा रहा है कि पिता को शेयर ट्रेडिंग में 20 से 30 लाख रुपये तक का नुकसान हुआ था.
आर्थिक तंगी के कारण ही घर के मोबाइल फोन बेचे जाने की बात सामने आई है. फोन बेचकर मिले पैसों से घर में बिजली का प्रीपेड रिचार्ज कराया गया, जो करीब 800 रुपये का था. इस तथ्य ने जांच को और गहरा कर दिया है.
पिता ने यह भी कहा कि आर्थिक नुकसान ही आत्महत्या की वजह नहीं हो सकता. लेकिन पुलिस इस एंगल को नजरअंदाज नहीं कर रही है, क्योंकि आर्थिक दबाव अक्सर घर के माहौल और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है.
पुलिस अब किस दिशा में जांच कर रही है?
फिलहाल पुलिस इस केस को कई एंगल से देख रही है. एक तरफ डायरी और सुसाइड नोट के आधार पर मानसिक स्थिति को समझने की कोशिश की जा रही है. दूसरी तरफ मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट की फोरेंसिक जांच से यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि बहनों का ऑनलाइन व्यवहार कैसा था और वे किन लोगों या किन ग्रुप्स से जुड़ी थीं.
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या तीनों बहनों को किसी ऑनलाइन ग्रुप, डिजिटल टास्क या किसी तरह की मानसिक मैनिपुलेशन का सामना करना पड़ा था. क्योंकि कई मामलों में सोशल मीडिया और ऑनलाइन कंटेंट बच्चों के दिमाग पर धीरे-धीरे ऐसा असर डाल देता है कि वे वास्तविक दुनिया से कटने लगते हैं.
सवाल है कि क्या यह केवल कोरियन ड्रामा और के-पॉप की दीवानगी का मामला था. या फिर सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट होना और मोबाइल छिनना एक बड़ा ट्रिगर बना. या फिर आर्थिक तंगी और घरेलू माहौल ने बच्चों को अंदर से कमजोर कर दिया. पुलिस की जांच इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है.
फिलहाल मोबाइल की फोरेंसिक रिपोर्ट और सोशल मीडिया अकाउंट की रिकवरी के बाद ही साफ हो पाएगा कि 12, 14 और 16 साल की इन बहनों की मौत की असली कड़ी क्या थी.
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