'कोरियन ऐप का अब तक नहीं मिला कोई सबूत, हां डायरी में...', गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड केस में बोली पुलिस

गाजियाबाद में तीन बहनों के सुसाइड केस में पुलिस जांच के दौरान बड़ा अपडेट सामने आया है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक ऐसा कोई तकनीकी सबूत नहीं मिला है, जिससे साबित हो कि तीनों बहनें किसी कोरियन टास्क-बेस्ड ऐप का इस्तेमाल कर रही थीं. हालांकि कमरे से मिली डायरी में कोरियन कल्चर और के-पॉप की बातें और पारिवारिक तनाव का जिक्र मिला है.

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तीन बहनों के सुसाइड मामले में कोरियन एप को लेकर बड़ा अपडेट आया सामने. (Photo: ITG) तीन बहनों के सुसाइड मामले में कोरियन एप को लेकर बड़ा अपडेट आया सामने. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • गाजियाबाद,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:50 AM IST

गाजियाबाद के ट्रिपल सुसाइड केस में पुलिस जांच के दौरान अब एक बड़ा अपडेट सामने आया है. पुलिस ने साफ कहा है कि अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि तीनों बहनें किसी 'कोरियन टास्क-बेस्ड ऐप' का इस्तेमाल कर रही थीं. हालांकि पुलिस ने यह भी माना है कि मृतक बहनों के कमरे से बरामद 9 पन्नों की पॉकेट डायरी में कोरियन कल्चर और के-पॉप के प्रति जुनून का जिक्र किया गया है.

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एजेंसी के अनुसार, मामला गाजियाबाद की भारत सिटी सोसायटी का है, जहां 12, 14 और 16 साल की तीन नाबालिग बहनों ने एक साथ 9वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी. इस घटना ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी. पिता ने दावा किया कि बच्चियां काफी समय से किसी कोरियन गेम या ऐप की लत में थीं. पुलिस अब इस दावे की पुष्टि करने में जुटी हुई है.

तीनों शवों के पोस्टमॉर्टम के बाद यमुना नदी के किनारे दिल्ली के निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार किया गया. शालीमार गार्डन के एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस अतुल कुमार सिंह ने बताया कि अंतिम संस्कार उनके पिता ने किया. एसीपी ने कहा कि यह पता नहीं चला है कि लड़कियों का अंतिम संस्कार बुधवार रात को क्यों किया गया. यह उनके निजी कारणों से हो सकता है, उन्होंने आगे कहा कि ऑटोप्सी रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि लड़कियों की मौत सिर में चोट लगने से हुई.

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डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (ट्रांस-हिंडन) निमिश पाटिल ने कहा कि पॉकेट डायरी को कब्जे में ले लिया गया है, और जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि हम उन परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं, जिनमें डायरी लिखी गई थी और इससे जुड़े सभी पहलुओं पर भी गौर कर रहे हैं. डीसीपी ने कहा कि पुलिस जांच के हिस्से के तौर पर परिवार की फाइनेंशियल स्थिति की भी जांच कर रही है.

यह भी पढ़ें: 'लो छुड़वाओगे हमसे कोरियन...' तीन बहनों को मौत के मुंह तक कैसे ले गया मोबाइल गेम? गाजियाबाद की हॉरर स्टोरी

यह मानते हुए कि वे इस घटना को आत्महत्या का मामला मान रहे हैं, इस पर उन्होंने कहा कि हमारी जांच मुख्य रूप से इस बात पर फोकस करेगी कि क्या लड़कियां सच में कोई टास्क-बेस्ड ऐप इस्तेमाल कर रही थीं, जैसा कि उनके पिता ने दावा किया है, और क्या उसी वजह से उन्होंने अपनी जान दी. DCP ने कहा कि अभी तक पुलिस के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि लड़कियां सच में कोई कोरियन टास्क-बेस्ड ऐप इस्तेमाल कर रही थीं.

डीसीपी ने कहा कि हमारे पास इस बात की पुष्टि करने के लिए कुछ भी नहीं है कि लड़कियां सच में कोई ऐप इस्तेमाल कर रही थीं, और अगर वह कोई कोरियन ऐप था. इसलिए हम माता-पिता से जानकारी लेंगे कि क्या उन्हें लड़कियों के इस्तेमाल किए जाने वाले टास्क-बेस्ड ऐप के बारे में कोई जानकारी थी.

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डायरी में लिखा- We love Korean, love love love...'

पुलिस के मुताबिक, मृतक बहनों के कमरे से एक पॉकेट डायरी मिली है, जिसमें उनके विचार, फीलिंग्स और परिवार को लेकर नाराजगी की बातें लिखी हैं. डायरी में कई बार लिखा गया है कि वे कोरियन कंटेंट, के-पॉप और कोरियन ड्रामा को 'अपनी जान' मानती थीं.

डायरी में अंग्रेजी में लिखी कुछ लाइनें बेहद चौंकाने वाली हैं. उसमें लिखा गया है- We love Korean… love love love… sorry papa.

डायरी में यह भी लिखा है कि परिवार उन्हें इन चीजों से अलग करने की कोशिश कर रहा था, जो उन्हें पसंद नहीं था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, डायरी में यह भी लिखा है कि उन्हें शादी और भविष्य को लेकर दबाव महसूस होता था. डायरी में यह लाइन भी है- 'मार से बेहतर है मरना, सॉरी पापा...'

हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अभी तक किसी प्रकार की गंभीर मारपीट के निशान नहीं मिले हैं. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि डायरी में 'मार' का जिक्र किस संदर्भ में किया गया.

पिता का दावा- 3 साल से कोरियन गेम की लत

मृतक बहनों के पिता चेतन कुमार ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटियां करीब तीन साल से कोरियन गेम और कंटेंट देख रही थीं. उनका कहना है कि बच्चियों ने धीरे-धीरे खुद को भारतीय पहचान से अलग करना शुरू कर दिया था.

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पिता के मुताबिक, बेटियां कहती थीं कि उन्हें 'कोरिया जाना है' और वहीं रहकर पढ़ाई करनी है. पिता ने यह भी दावा किया कि वे 'इंडिया' नाम सुनते ही गुस्सा करने लगती थीं और भारतीय खाने तक से परहेज करने लगी थीं.

पिता ने पुलिस को यह भी बताया कि बच्चियों ने अपने नाम बदलकर कोरियन नाम रख लिए थे और सोशल मीडिया पर भी उसी पहचान से एक्टिव थीं.

सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट होने की बात भी सामने आई

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मृतक बहनों ने सोशल मीडिया पर एक अकाउंट बनाया था, जिसमें उनके फॉलोअर्स तेजी से बढ़ रहे थे. बताया जा रहा है कि करीब 10 दिन पहले पिता को इस अकाउंट की जानकारी मिली और उन्होंने वह अकाउंट डिलीट कर दिया.

यह भी पढ़ें: 10 दिन पहले अकाउंट डिलीट, मोबाइल छीना... 3 बहनों की खुदकुशी के बाद अब किस दिशा में जांच कर रही पुलिस?

इसके बाद घर में तनाव बढ़ गया और बच्चियां मानसिक रूप से परेशान रहने लगीं. हालांकि पुलिस अभी तक इस बात की भी पुष्टि नहीं कर पाई है कि अकाउंट किस प्लेटफॉर्म पर था और उसमें क्या गतिविधि थी.

अब पुलिस की नजर इस बात पर है कि क्या सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट होना इस घटना का ट्रिगर पॉइंट बना.

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मोबाइल फोन सबसे बड़ा सुराग, लेकिन दोनों फोन गायब

इस केस में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बच्चियों के पास मौजूद दो मोबाइल फोन अब तक रिकवर नहीं हो पाए हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एक फोन 7 से 8 महीने पहले बेच दिया गया था, जबकि दूसरा फोन करीब 15 दिन पहले बेचा गया.

पुलिस अब उन दोनों फोन को ट्रेस करने की कोशिश कर रही है. वहीं, घर में मौजूद मां का फोन, जो बच्चियां फिलहाल इस्तेमाल कर रही थीं, उसे पुलिस ने सीज कर लिया है और फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है.

पुलिस का मानना है कि अगर किसी ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल हुआ होगा, तो उसकी पुष्टि मोबाइल डेटा और डिजिटल ट्रेस से ही हो सकेगी.

आर्थिक स्थिति के एंगल को लेकर भी हो रही जांच

पुलिस इस केस में परिवार की आर्थिक स्थिति को भी एक अहम एंगल मान रही है. सोसाइटी के कुछ लोगों और सूत्रों का दावा है कि पिता पर भारी कर्ज था और शेयर ट्रेडिंग में उन्हें बड़ा नुकसान हुआ था.

बताया जा रहा है कि कर्ज का आंकड़ा काफी बढ़ गया था. यहां तक कि बिजली बिल चुकाने के लिए मोबाइल फोन बेचने की बात भी सामने आई है.

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पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि परिवार की आर्थिक स्थिति और घरेलू तनाव की जांच भी चल रही है.

सोसाइटी में सवाल- तीन साल तक किसी को भनक क्यों नहीं लगी

महिला ने कहा कि उसने लड़कियों को कभी स्कूल जाते या सोसायटी पार्क में दूसरे बच्चों के साथ खेलते हुए नहीं देखा. उन्होंने कहा कि उनका अकेलापन सालों तक किसी की नजर में नहीं आया.

सोसायटी की एक अन्य महिला ने कहा कि इस उम्र में बच्चे बहुत नाजुक होते हैं. फोन या टैबलेट छीनने जैसे अचानक के काम भी उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकते हैं. सोसायटी के वाइस-प्रेसिडेंट अजय कसाना का कहना था कि कोरोना के बाद से तीनों बच्चे पढ़ने नहीं जा रहे थे. 

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल- वजह क्या थी

गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड केस अब एक जटिल जांच बन चुका है. एक तरफ डायरी में कोरियन कल्चर को लेकर जुनून और नाराजगी का जिक्र है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस के पास अभी तक ऐसा कोई तकनीकी प्रमाण नहीं है, जिससे किसी कोरियन ऐप की बात साबित हो सके.

अब पुलिस की जांच तीन मुख्य बिंदुओं पर टिकी है कि क्या कोई कोरियन टास्क-बेस्ड ऐप या गेम मौजूद था? सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट होने का असर कितना बड़ा था? घरेलू तनाव और आर्थिक दबाव का बच्चियों पर क्या प्रभाव पड़ा? फिलहाल पुलिस डिजिटल सबूतों की तलाश कर रही है.

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