गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में तीन सगी बहनों के एक साथ सुसाइड केस की जांच अब भी किसी नतीजे पर पहुंचता नहीं दिख रही, बल्कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जो इस दर्दनाक घटना को और रहस्यमय बना रहे हैं.
बुधवार तड़के नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली 16, 14 और 12 साल की बहनों की मौत को लेकर शुरुआत में ऑनलाइन गेम की लत को वजह माना गया था. लेकिन अब पुलिस जांच, परिवार के बयान और घटनास्थल से जुड़े नए खुलासे इस कहानी को सुलझाने के बजाय और उलझा रहे हैं.
छलांग का तरीका बना सबसे बड़ा सवाल
सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सच अब सामने आया है कि तीनों बहनों ने एक साथ छलांग नहीं लगाई थी. पुलिस जांच में यह बात स्पष्ट हुई है कि दो बहनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर बालकनी से साथ में छलांग लगाई, जबकि तीसरी बहन ने पूजा कक्ष की खिड़की से अलग से कूदकर जान दे दी. यह तथ्य कई सवाल खड़े करता है. अगर यह एक सामूहिक फैसला था, तो तीनों ने एक ही जगह से छलांग क्यों नहीं लगाई? अगर यह अचानक लिया गया निर्णय था, तो छलांग का यह क्रम कैसे बना ?
सब सो रहे थे, बच्चियां पानी पीने उठीं
घटना के बाद पिता चेतन कुमार का बयान भी अब चर्चा में है. पिता के मुताबिक, जिस वक्त यह हादसा हुआ, पूरा परिवार गहरी नींद में था. उन्होंने पुलिस को बताया कि मेरी पत्नी अंदर वाले कमरे में सो रही थीं. पूरा घर शांत था. बच्चियां पानी पीने के बहाने उठीं, अंदर से दरवाजा बंद किया और बालकनी से कूद गईं. यह बयान अपने आप में कई परतें खोलता है. सबसे अहम सवाल यह है कि क्या तीनों बच्चियां पहले से मानसिक रूप से किसी फैसले पर पहुंच चुकी थीं ? या फिर यह किसी एक पल में लिया गया सामूहिक कदम था ? दरवाजा अंदर से बंद होना भी जांच का अहम बिंदु बन गया है. पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या बच्चियों ने जानबूझकर खुद को घर के बाकी सदस्यों से अलग किया था.
उस रात फ्लैट में मौजूद थी मौसी
न्यूज एजेंसी के मुताबिक जांच में सामने आया एक और अहम तथ्य यह है कि घटना वाली रात दोनों पत्नियों की सबसे छोटी बहन भी उसी फ्लैट में मौजूद थी. मतलब साफ है कि उस रात घर में सामान्य दिनों से एक सदस्य ज्यादा था. हालांकि पुलिस अभी इस बिंदु को किसी शक के तौर पर नहीं देख रही है, लेकिन हर पहलू से जांच की जा रही है. सवाल यह उठता है कि क्या बच्चियों की मनःस्थिति पर उस रात किसी बातचीत या माहौल का असर पड़ा? क्या किसी ने कुछ ऐसा कहा या सुना, जिसने हालात को और बिगाड़ दिया ? पुलिस इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए मां और मौसी से भी पूछताछ कर सकती है. पिता के बयान से एक और अहम बात सामने आई है. बीच वाली बहन प्राची खुद को बॉस मानती थी और कहती थी कि उसकी बहनें उसकी बात मानती हैं. तीनों बहनें लगभग हर काम साथ करती थीं. खाना, नहाना, मोबाइल देखना यहां तक कि देर तक एक ही कमरे में रहना. पुलिस को शक है कि यह आपसी भावनात्मक निर्भरता इतनी गहरी हो चुकी थी कि किसी एक के फैसले ने बाकी दो को भी उसी दिशा में धकेल दिया.
दो साल से स्कूल से कट चुकी थीं तीनों बहनें
जांच में यह भी साफ हो चुका है कि तीनों बहनें पिछले करीब दो वर्षों से स्कूल नहीं जा रही थीं. पढ़ाई में लगातार पिछड़ने और असफलता के बाद उन्होंने खुद को समाज और दोस्तों से अलग कर लिया था. दिन का ज्यादातर समय वे अपने कमरे में मोबाइल फोन के साथ बिताती थीं. बाहर निकलना, दोस्तों से मिलना या किसी गतिविधि में हिस्सा लेना लगभग बंद हो चुका था. यहीं से पुलिस को शक है कि बच्चियों की दुनिया धीरे-धीरे असल जिंदगी से कटकर वर्चुअल दुनिया तक सीमित हो गई थी.
ऑनलाइन गेम या भावनात्मक निर्भरता
पुलिस और साइबर टीम की शुरुआती जांच में सामने आया है कि बच्चियां एक कोरियन टास्क-बेस्ड इंटरैक्टिव गेम से जुड़ी थीं. इस गेम में भावनात्मक जुड़ाव, रिश्तों और आदेशों की भूमिका अहम बताई जा रही है. पिता का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि गेम में किसी तरह के टास्क शामिल हैं. बच्चियां अक्सर कोरिया जाने की बात करती थीं, जिसे उन्होंने सामान्य रुचि मानकर नजरअंदाज कर दिया. हालांकि, जांच अधिकारी मानते हैं कि मामला सिर्फ गेम तक सीमित नहीं हो सकता. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार जब बच्चे असल दुनिया से कट जाते हैं और सिर्फ एक डिजिटल पहचान में जीने लगते हैं, तो उनका निर्णय लेने का तरीका भी बदल जाता है.”
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश पुलिस अब इस केस को सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि मल्टी-डायमेंशनल इन्वेस्टिगेशन के तौर पर देख रही है. मोबाइल फोन, डायरी, कॉल डिटेल, ऐप्स, चैट हिस्ट्री और पारिवारिक बातचीत सब कुछ खंगाला जा रहा है. डीजीपी राजीव कृष्ण ने साफ कहा है कि मामले की हर परत की जांच होगी और किसी भी निष्कर्ष पर जल्दबाजी नहीं की जाएगी.
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