गाजियाबाद में 3 सगी बहनों के सुसाइड मामले में मनोवैज्ञानिक राजीव शर्मा ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि गेम ने बच्चियों की दिमाग को पूरी तरह अंदर से भ्रमित कर दिया था. गेम की आदी होने के चलते बच्चियां 24 घंटे उसी के बारे में सोच रही थीं. जिससे वे डिप्रेशन में थीं. इसलिए पैरेंट्स को समझना बहुत जरूरी है और बच्चों को ऐसी चीजों से दूर रखना चाहिए.
शर्मा के मुताबिक जैसा कि बच्चियां पिछले 2 वर्षों से स्कूल नहीं जा रही थीं और घर पर ही रह रही थीं. उनका कोई रूटीन नहीं था. साथ ही ये सभी अन्य बच्चों से भी कटे हुए थे. सभी बच्चियों पर गेम हावी था. जिसके चलते ये रात में भी उठकर गेम खेलते होंगी. इस स्थिति में अगर पहला बच्चा जो कदम उठाता है, वही दूसरा और तीसरा या अन्य बच्चे भी उठाते हैं.
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शर्मा के मुताबिक ऐसी स्थिति में बच्चों पर इमोशनल चीजें भी काम करती हैं. साथ ही उनमें डर और उदासी भी होती है. अगर बच्चों की उम्र कम होती है तो वे लगातार यही सोचते हैं कि बिना ये चीज किए नहीं रह सकते हैं. यही वजह है कि बच्चे इस तरह के कदम उठा लेते हैं. इसके अलावा बच्चे इस स्थिति में एक दूसरे को खुद से अकेला भी नहीं छोड़ते हैं.
पैरेंट्स इन बातों का रखें ध्यान
फैमिली किन चीजों का ध्यान रख सकती है जिनसे उन्हें पता लगे कि उनके बच्चे काफी गंभीर स्ट्रेस में हो सकते हैं. उसमें सबसे पहले तो है सोशल आइसोलेशन यानी अकेलापन. चाहे वो दो, तीन बच्चों का मिलके हो या एक बच्चा खुद से अकेला रहता हो. उसकी नींद का पैटर्न बदलना, स्कूल ना जाना और मूड स्विंग्स होना. इसके अलावा होपलेस फील करना, अकेलापन महसूस करना आदि है. पैरेंट्स को अगर ये चीचें दिखें तो बच्चों की काउंसलिंग करना चाहिए और उनका विशेष ध्यान देना चाहिए.
फिलहाल इस सुसाइड केस में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. बच्चों के फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. कूदने के लिए बच्चों ने दो स्टेप वाली सीढ़ी का इस्तेमाल किया, किसके कहने पर वो ये गेम खेलना शुरू की जांच जारी है. सुसाइड नोट में कोरियन कल्चर का जिक्र है. जानकारी यह भी सामने आई है कि कुछ दिन से परिवार ने मोबाइल पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके अलावा सुसाइड से पहले कमरे में परिवार संग खिंची गई फोटो भी बिखरी मिली.
जितेंद्र बहादुर सिंह