उत्तर भारत के बड़े इंडस्ट्रियल हब कानपुर में गैस और ईंधन के संकट ने स्टील इंडस्ट्री की कमर तोड़ दी है. कभी मशीनों की गूंज से गुलजार रहने वाली दादा नगर इंडस्ट्रियल एरिया की रोलिंग मिलें अब शांत होने की कगार पर हैं.
गैस की भारी किल्लत और कोयले की आसमान छूती कीमतों के कारण करोड़ों रुपये की मशीनें अपनी क्षमता से आधी गति पर चल रही हैं, जिससे अरबों का कारोबार प्रभावित हो रहा है. गैस संकट से स्टील इंडस्ट्री बेहाल है और रोलिंग मिलों का उत्पादन ठप के कगार पर है.
दादा नगर इंडस्ट्रियल एरिया में पहले जहां सरिया पूरी तरह गैस से काटा जाता था, अब बचत के लिए हथौड़े से तोड़ा जा रहा है. करोड़ों रुपये की मशीनें लगी हैं, लेकिन गैस संकट के कारण आधी क्षमता पर ही चल रही हैं.
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गैस और कोयले की महंगाई से रोलिंग मिल उद्योग तो संकट में है ही, साथ में LPG/PNG की कमी से उत्पादन आधा रह गया है और मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है. फैक्ट्री संचालक नरेश पंजाबी के मुताबिक, पहले पूरी कटिंग गैस से होती थी, अब कमी के कारण हैमरिंग का सहारा लेना पड़ रहा है.
कमर्शियल सिलेंडर ₹1800 से बढ़कर ब्लैक में ₹6000 तक पहुंच गया है. कोयला ₹18,000 से बढ़कर ₹24,000 प्रति टन हो गया है. सिर्फ PNG कनेक्शन वाली करीब 200 फैक्ट्रियों में ही काम चल पा रहा है.
फैक्ट्री संचालक नरेश पंजाबी के अनुसार, पहले सरिया पूरी तरह गैस से काटा जाता था, लेकिन अब बचत के लिए हल्की कटिंग कर हथौड़े से तोड़ा जा रहा है. मौके पर मौजूद मजदूरों ने बताया कि वे मजबूरी में ₹300 प्रति किलो तक के छोटे सिलेंडर खरीदकर खाना बना रहे हैं, जिससे खर्च बढ़ गया है और आधे मजदूर गांव लौट चुके हैं.
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यहां फैक्ट्रियों में गैस की डिमांड बनी है, लेकिन उत्पादन घटने से सप्लाई प्रभावित है. इंडस्ट्री प्रतिनिधियों ने सरकार से कालाबाजारी रोकने और नियमित सप्लाई की मांग की है.
सिमर चावला