CAA लागू होते ही हाई अलर्ट पर यूपी पुलिस, अफवाह फैलाने वालों पर पैनी नजर

सीएए की नोटिफिकेशन जारी होने के बाद यूपी के बिजनौर जिले में पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है. सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस कड़ी नजर रख रही हैं. CAA को लेकर झूठ और भ्रामक पोस्ट व शेयर करने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा. यूपी के 14 जिलों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है.

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बिजनौर में पुलिस ने किया फ्लैग मार्च बिजनौर में पुलिस ने किया फ्लैग मार्च

संजीव शर्मा

  • बिजनौर ,
  • 11 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 9:44 PM IST

सीएए की नोटिफिकेशन जारी होने के बाद यूपी के बिजनौर जिले में पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है. मुस्लिम मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस फोर्स द्वारा फ्लैग मार्च किया जा रहा है. जिले में हर जगह पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है. अधिकारी लगातार पुलिसकर्मियों के साथ सड़कों पर उतरकर फ्लैग मार्च कर रहे हैं. सीएए को लेकर पश्चिमी यूपी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. मेरठ, मुजफ्फरनगर सहित विभिन्न जिलों में पुलिस प्रशासन अलर्ट है. संवेदनशील स्थानों पर पैरामिलट्री फोर्स को तैनात किया गया है.

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सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस कड़ी नजर रख रही हैं. CAA को लेकर झूठ और भ्रामक पोस्ट व शेयर करने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा. इसके लिए दिल्ली-एनसीआर समेत देश भर की इंटेलिजेंस विंग पुलिस अलर्ट और मुस्तेद हैं. झूठी अफवाह फैलाने वालों पर पैनी नजर रखी जा रही है. 

यूपी के 14 जिलों की पुलिस हाई अलर्ट पर

सीएए लागू होने के बाद यूपी के 14 जिलों को हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है. लखनऊ, बरेली, मेरठ, कानपुर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, प्रयागराज, मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, गाजियाबाद, गाजीपुर और वाराणसी जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. इन सभी इलाकों में रात्रि गश्त और पैदल गश्त बढ़ाने के भी आदेश दिए गए हैं.

2019 में ही संसद के दोनों सदनों से पास हो गया था बिल

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बता दें, नागरिकता कानून में संशोधन का बिल दिसंबर 2019 में ही संसद के दोनों सदनों से पास हो गया था. जनवरी 2020 में राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी भी दे दी थी. इसके नियम नहीं बन पाने के कारण इसे अमल में लाने में देरी हो रही थी. आमतौर पर कोई भी कानून बनने के बाद 6 महीने के भीतर उसके नियम बनाने होते हैं. अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो उसके लिए संसद से समय मांगना पड़ता है. सीएए के मामले में ऐसा ही हुआ. गृह मंत्रालय ने 9 बार एक्सटेंशन मांगा था. 

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