Uttar Pradesh News: बरेली नगर निगम ने शहर के दो प्रमुख इलाकों में अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत करीब 350 मकानों और दुकानों पर लाल निशान लगा दिए हैं. थाना सीबी गंज के खलीलपुर में 300 घरों और कोतवाली क्षेत्र के कोहरापीर रोड पर 50 से अधिक पुरानी दुकानों को सड़क चौड़ीकरण की जद में चिह्नित किया गया है. मुख्यमंत्री ग्रिड योजना के तहत महादेव सेतु से डेलापीर तक सड़क को दोनों तरफ 31-31 फीट चौड़ा किया जाना है. नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा और खुद अतिक्रमण न हटाने पर निगम इसे ढहाकर खर्चा भी वसूलेगा.
खलीलपुर गांव में मलबे में तब्दील हो जाएंगे आशियाने?
सीबीगंज के खलीलपुर गांव में 300 संपत्तियों पर निशान लगने से ग्रामीण दहशत में हैं. स्थानीय निवासी लालमन सिंह और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि वे यहां 30-35 वर्षों से रह रहे हैं और उनके पास 1955 तक की ग्राम पंचायत की रसीदें व पुख्ता कागजात हैं.
लोगों का आरोप है कि नगर निगम ने बिना जानकारी दिए गलत तरीके से निशान लगाए हैं. ग्रामीणों को डर है कि यदि बुलडोजर चला, तो पूरा गांव ही मलबे का ढेर बन जाएगा, जबकि उनके पास वैध ओनरशिप पेपर मौजूद हैं.
60 साल पुरानी मार्केट और 50 दुकानों पर संकट
कोतवाली और प्रेमनगर क्षेत्र को जोड़ने वाली कोहरापीर रोड पर व्यापारियों की नींद उड़ी हुई है. यहां करीब 50 ऐसी दुकानें हैं जो 60 साल पुरानी हैं. व्यापारियों का कहना है कि निशान के मुताबिक दुकानों का 70 से 80 फीसदी हिस्सा टूट जाएगा, जिससे उनका व्यापार पूरी तरह चौपट हो जाएगा. व्यापारी संजीव अग्रवाल और सुयैव खान के मुताबिक, नाप गलत तरीके से की जा रही है. सड़क के मध्य से 62 फीट की जगह खाली कराने के चक्कर में पूरी-पूरी दुकानें खत्म होने की कगार पर हैं.
विकास से खुशी पर उजड़ने का गम
कोहरापीर रोड पर ऑटो पार्ट्स का काम करने वाले गुरदीप सिंह और अन्य व्यापारियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से कार्रवाई की जा रही है, उससे हजारों परिवार सड़क पर आ जाएंगे. उनका आरोप है कि बड़े व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए नाप में हेरफेर किया जा रहा है. व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से मुलाकात की है, जहां उन्हें समाधान का आश्वासन मिला है, लेकिन लाल निशान हटने तक उनका डर बरकरार है.
नगर निगम का सख्त रुख: नहीं मिलेगा मुआवजा
नगर निगम के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार राठी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अभी सिर्फ लाल निशान लगाए गए हैं और जल्द ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होगी. निगम का कहना है कि यह पूरी तरह अतिक्रमण है, इसलिए किसी भी संपत्ति के लिए कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो लोग खुद अपना अवैध निर्माण नहीं हटाएंगे, नगर निगम उसे तोड़कर उसका खर्च (ढहाने का शुल्क) भी उन्हीं दुकानदारों और मकान मालिकों से वसूलेगा.
कृष्ण गोपाल राज