बागपत के बड़ागांव मंदिर में 'ड्रेस कोड' लागू: जीन्स-टॉप और मिनी स्कर्ट पर बैन, पोस्टर लगाकर दी नो एंट्री की चेतावनी

बागपत के बड़ागांव मंदिर में अब भगवान के दर्शन के लिए 'ड्रेस कोड' का पालन करना होगा. मंदिर समिति ने परिसर में पोस्टर लगाकर साफ कर दिया है कि छोटे कपड़े, जीन्स-टॉप या मिनी स्कर्ट पहनकर आने वाली महिलाओं और लड़कियों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा.

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बागपत जिले के बड़ागांव स्थित मंदिर कमेटी का फैसला (Photo- Screengrab) बागपत जिले के बड़ागांव स्थित मंदिर कमेटी का फैसला (Photo- Screengrab)

मनुदेव उपाध्याय

  • बागपत ,
  • 30 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:14 PM IST

UP News: बागपत जिले के बड़ागांव स्थित मंदिर की कार्यकारिणी कमेटी ने धार्मिक मर्यादा और परंपराओं का हवाला देते हुए महिलाओं के पहनावे पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है. मंदिर प्रबंधन ने परिसर में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर ऐलान किया है कि जीन्स-टॉप, हाफ पैंट, बरमूडा और मिनी स्कर्ट जैसे आधुनिक लिबास पहनकर आने वालों की एंट्री पूरी तरह वर्जित रहेगी. समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए केवल शालीन और पारंपरिक भारतीय वस्त्रों में ही दर्शन के लिए आएं. यह फैसला मंगलवार से प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है.

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संस्कृति और सादगी का दिया हवाला

मंदिर समिति के प्रबंधक त्रिलोक चंद जैन और सदस्य पवन जैन का कहना है कि मंदिर एक बेहद पवित्र स्थल है, जहां संयम और सादगी का माहौल होना चाहिए. उनके मुताबिक, आजकल कुछ लोग ऐसे कपड़े पहनकर आते हैं जो मंदिर के वातावरण के अनुकूल नहीं हैं. 

समिति का मानना है कि ड्रेस कोड लागू होने से मंदिर में अनुशासन बना रहेगा. प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी की व्यक्तिगत आजादी को छीनने के लिए नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए उठाया गया है.

पोस्टर लगते ही शुरू हुई बहस

मंदिर परिसर में जैसे ही 'ड्रेस कोड' का पोस्टर लगा, इलाके में इसे लेकर चर्चा और बहस तेज हो गई है. हालांकि, देश के कई अन्य बड़े मंदिरों में भी ऐसे नियम लागू हैं, लेकिन बागपत में विशेष रूप से लड़कियों और महिलाओं के कपड़ों को लेकर जारी किए गए निर्देशों ने इस मामले को संवेदनशील बना दिया है. फिलहाल मंदिर कमेटी अपने फैसले पर अडिग है और इसे लागू कराने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है. समिति के सदस्यों का तर्क है कि मंदिर में सादगी से प्रवेश करना ही उचित है.

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