'योगी विरोधी खुशफहमी ना पालें', अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बोलीं उमा भारती

भाजपा की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विवाद पर अपना रुख साफ करते हुए कहा कि उनके बयान को योगी विरोधी न समझा जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सम्मान करती हैं. उमा भारती ने कहा कि कानून-व्यवस्था पर सख्ती जरूरी है, लेकिन किसी से शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है, जिसका अधिकार केवल विद्वत परिषद को है.

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उमा भारती ने अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर प्रतिक्रिया दी है. (Photo: ITG) उमा भारती ने अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर प्रतिक्रिया दी है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने शंकराचार्य और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए योगी आदित्यनाथ के विरोध की अटकलों को खारिज किया है. उन्होंने साफ कहा कि उनके बयान को योगी विरोधी नजरिए से न देखा जाए, क्योंकि उनका कथन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नहीं है. उमा भारती ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वाले मसले पर कहा, 'योगी विरोधी खुशफहमी न पालें.' 

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उमा भारती ने कहा कि वह योगी जी के प्रति सम्मान, स्नेह और शुभकामनाओं का भाव रखती हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन को पूरी सख्ती के साथ नियंत्रण रखना चाहिए और अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने एक अहम मर्यादा का सवाल भी उठाया.

शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन
उमा भारती ने X पोस्ट में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वाले मसले पर कहा कि किसी व्यक्ति से यह मांग करना कि वह शंकराचार्य होने का सबूत दे, मर्यादा का उल्लंघन है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शंकराचार्य जैसे पद की वैधता तय करने का अधिकार केवल विद्वत परिषद या परंपरागत धार्मिक संस्थाओं को है, न कि प्रशासन या किसी अन्य संस्था को. उनके अनुसार, प्रशासन का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, न कि धार्मिक पदों की वैधता पर सवाल उठाना.

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क्या था उमा भारती का X पोस्ट?
योगी विरोधी खुश फहमी ना पालें, मेरा कथन योगी जी के विरुद्ध नहीं है, मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं किंतु मैं इस बात पर कायम हूं कि प्रशासन कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करे लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है, यह सिर्फ शंकराचार्य या विद्वत परिषद कर सकते हैं.

उमा भारती के बयान के क्या हैं मायने?
उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन परंपरा से जुड़ा हुआ है और इसका सम्मान बनाए रखना समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है. उमा भारती के इस बयान को मौजूदा विवाद के बीच संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने एक ओर प्रशासनिक सख्ती की बात की तो दूसरी ओर धार्मिक मर्यादा की रक्षा पर भी जोर दिया.

उमा भारती के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है. उनके इस रुख को योगी सरकार के प्रति समर्थन के साथ-साथ धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता के पक्ष में एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है.

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