ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर निवासी 72 वर्षीय दिलीप कुमार दास से साइबर ठगों ने 1.29 करोड़ रुपये की ठगी की है. 6 फरवरी 2026 को खुद को TRAI अधिकारी बताने वाले ठग ने दिलीप को कॉल कर उनके सिम से अवैध काम होने का डर दिखाया. सीबीआई जांच का हवाला देकर उन्हें मुंबई बुलाया गया और असमर्थता जताने पर वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया. ठगों ने नकली अदालत और जज दिखाकर बैंक खातों के सत्यापन के नाम पर रकम ट्रांसफर करवाई. दिलीप ने 12 मार्च को साइबर क्राइम थाने में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई है.
नकली अदालत और जज का खौफनाक ड्रामा
ठगों ने दिलीप कुमार को डराने के लिए पूरी स्क्रिप्ट तैयार की थी. वीडियो कॉल के दौरान उन्हें एक ऐसा सेटअप दिखाया गया जो बिल्कुल अदालत जैसा लग रहा था. इसमें जज और पुलिस की वर्दी पहने लोग मौजूद थे.
ठगों ने उन पर बैंक खाता बेचने और करोड़ों के अवैध लेनदेन का आरोप मढ़ा. दबाव इतना बनाया गया कि बुजुर्ग को लगा कि वह वाकई किसी बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस गए हैं. इसी डर का फायदा उठाकर ठगों ने उनके खातों का 'वेरिफिकेशन' करने के बहाने पैसे मांगे.
RTGS और UPI के जरिए पार की गाढ़ी कमाई
दबाव में आकर दिलीप कुमार ने अलग-अलग तारीखों में RTGS और UPI के माध्यम से कुल 1,29,61,962 रुपये ठगों द्वारा दिए गए विभिन्न बैंक खातों में भेज दिए. ठगी को असली जामा पहनाने के लिए आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट और मुंबई पुलिस के नाम का एक फर्जी 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट' भी भेजा. जब काफी समय बीतने के बाद भी पैसा वापस नहीं आया, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ. फिलहाल नोएडा के सेक्टर-36 स्थित साइबर क्राइम थाना पुलिस संदिग्ध बैंक खातों की जांच कर रही है.
भूपेन्द्र चौधरी