यूपी में सरकारी नौकरी करने वालों के लिए नियम में हुआ बदलाव, सीएम योगी ने दी मंजूरी

यूपी की योगी सरकार ने कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों के लिए आचरण नियमावली में अहम बदलाव को मंजूरी दी है. अब कर्मचारियों को बड़े निवेश, चल संपत्ति की खरीद और अचल संपत्ति की जानकारी हर साल देनी होगी. इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 की नई नीति को भी मंजूरी मिली है, जिसके तहत गरीब और मध्यम वर्ग को घर बनाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार से आर्थिक सहायता दी जाएगी.

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सीएम याेगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में कई फैसले लिए गए (File Photo: PTI) सीएम याेगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में कई फैसले लिए गए (File Photo: PTI)

समर्थ श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 11 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:54 AM IST

यूपी में सरकारी नौकरी करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए नियमों में अहम बदलाव किया गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 में संशोधन को मंजूरी दे दी गई. सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के निवेश, चल-अचल संपत्ति और वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ाना है, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक स्पष्ट और जवाबदेह बन सके.

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कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद सरकारी कर्मचारियों को अब अपने निवेश और संपत्ति से जुड़ी जानकारी पहले की तुलना में अधिक नियमित रूप से देनी होगी. सरकार का मानना है कि इससे सरकारी सेवा में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं की संभावना कम होगी. उत्तर प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली वर्ष 1956 से लागू है. समय-समय पर इसमें परिस्थितियों के अनुसार संशोधन किए जाते रहे हैं. अब जो बदलाव किए गए हैं, वे मुख्य रूप से नियम-21 और नियम-24 से संबंधित हैं. सरकार का कहना है कि वर्तमान समय में निवेश के तरीके तेजी से बदल रहे हैं. शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश बढ़ा है. ऐसे में कर्मचारियों के निवेश की जानकारी प्रशासन के पास होना आवश्यक है, ताकि किसी प्रकार के हितों के टकराव या अनियमितता से बचा जा सके.

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शेयर और निवेश की जानकारी देना होगी

संशोधित नियम-21 के तहत अब यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष के दौरान अपने मूल वेतन के छह महीने से अधिक की राशि शेयर, स्टॉक या अन्य वित्तीय साधनों में निवेश करता है, तो उसे इसकी जानकारी अपने सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी. पहले इस तरह के निवेश के बारे में सूचना देने की व्यवस्था उतनी स्पष्ट नहीं थी, लेकिन अब इसे स्पष्ट रूप से नियमों में शामिल कर दिया गया है. सरकार के अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि बड़े वित्तीय निवेशों की जानकारी विभाग के पास रहे और जरूरत पड़ने पर उसकी जांच या सत्यापन किया जा सके.

चल संपत्ति की खरीद पर भी सूचना अनिवार्य

सरकार ने नियम-24 में भी बदलाव किया है. अब यदि कोई कर्मचारी अपने दो महीने के मूल वेतन से अधिक कीमत की चल संपत्ति खरीदता है, तो उसे इसकी सूचना संबंधित अधिकारी को देनी होगी. पहले यह सीमा एक महीने के मूल वेतन के बराबर थी. यानी पहले छोटी-सी खरीदारी पर भी सूचना देनी पड़ती थी. अब सीमा बढ़ाकर दो महीने के वेतन के बराबर कर दी गई है, जिससे कर्मचारियों को थोड़ी राहत भी मिलेगी. चल संपत्ति में वाहन, महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कीमती सामान या अन्य मूल्यवान वस्तुएं शामिल हो सकती हैं.

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हर साल देनी होगी अचल संपत्ति की जानकारी

कैबिनेट बैठक में अचल संपत्ति से संबंधित नियमों में भी अहम संशोधन किया गया है. पहले सरकारी कर्मचारियों को हर पांच वर्ष में एक बार अपनी अचल संपत्ति की जानकारी देनी होती थी. लेकिन अब यह व्यवस्था बदल दी गई है. नई व्यवस्था के अनुसार अब कर्मचारियों को हर वर्ष अपनी अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य होगा. इसमें जमीन, मकान, फ्लैट या अन्य अचल संपत्तियां शामिल होंगी. सरकार का कहना है कि इससे संपत्ति की जानकारी नियमित रूप से अपडेट होती रहेगी और पारदर्शिता बनी रहेगी. राज्य सरकार का मानना है कि इन नियमों में बदलाव से सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों के लिए निवेश और संपत्ति की जानकारी देना कई राज्यों और केंद्र सरकार की सेवाओं में पहले से ही लागू व्यवस्था का हिस्सा है. उत्तर प्रदेश में इसे और स्पष्ट और नियमित बनाने का प्रयास किया गया है. सरकार के मुताबिक इन बदलावों से कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों की निगरानी आसान होगी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण में भी मदद मिल सकती है.

पीएम आवास योजना-शहरी 2.0 के लिए नई नीति को मंजूरी

कैबिनेट बैठक में एक और बड़ा फैसला प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लिया गया. प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के अंतर्गत किफायती आवास और किराये के आवास के निर्माण के लिए नई नीति को मंजूरी दे दी गई है. सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य शहरों में रहने वाले मध्यम और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को सस्ती दरों पर आवास उपलब्ध कराना है.

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लाभार्थियों को मिलेगी आर्थिक सहायता

नई नीति के तहत आवास निर्माण के लिए प्रत्येक लाभार्थी को आर्थिक सहायता दी जाएगी. इसमें केंद्र सरकार की ओर से 1.50 लाख रुपये राज्य सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी. इस तरह एक लाभार्थी को कुल 2.50 लाख रुपये की सहायता मिल सकेगी. सरकार का मानना है कि इस आर्थिक सहायता से लाखों परिवारों के लिए घर बनाना आसान हो जाएगा.

डेवलपर्स को भी मिलेगी कई तरह की छूट

सरकार ने योजना को आकर्षक बनाने के लिए डेवलपर्स को भी कई तरह की छूट देने का निर्णय लिया है. व्हाइटलिस्टेड परियोजनाओं में काम करने वाले डेवलपर्स को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में छूट, मानचित्र स्वीकृति शुल्क में राहत, बाह्य विकास शुल्क में छूट दी जाएगी. इसके अलावा लाभार्थियों को स्टाम्प शुल्क में भी राहत दी जाएगी, जिससे मकान खरीदना या बनवाना सस्ता हो सके.

किराये के किफायती आवास का मॉडल

नई नीति में किफायती किराया आवास (ARH) मॉडल को भी शामिल किया गया है. इस मॉडल के तहत शहरों में काम करने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए किराये के घर बनाए जाएंगे. इन घरों का निर्माण निजी संस्थाएं, सार्वजनिक संस्थाएं, औद्योगिक इकाइयां कर सकेंगी. इन आवासों का संचालन और रखरखाव भी वही संस्थाएं करेंगी.

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किन लोगों को मिलेगा लाभ

सरकार के अनुसार यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए बनाई गई है जिन्हें शहरों में सस्ता और सुरक्षित आवास नहीं मिल पाता. इनमें शामिल हैं: शहरी गरीब परिवार, कामकाजी महिलाएं, औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारी, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवार सरकार का लक्ष्य है कि शहरों में रहने वाले जरूरतमंद लोगों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जाए.

कांशीराम आवास को लेकर भी बड़ा फैसला

कैबिनेट बैठक में कांशीराम आवास योजना को लेकर भी अहम निर्णय लिया गया. प्रदेश के कई जिलों में बने कांशीराम आवासों पर अनधिकृत कब्जे की शिकायतें सामने आई थीं. सरकार ने तय किया है कि ऐसे मामलों की जांच कराई जाएगी. वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि जिन आवासों पर अनधिकृत कब्जा पाया जाएगा, उन्हें खाली कराया जाएगा. इसके बाद उन मकानों की मरम्मत, रंगाई-पुताई, आवश्यक सुधार कराकर उन्हें दोबारा पात्र दलित परिवारों को आवंटित किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इन आवासों का निर्माण जरूरतमंद लोगों के लिए किया गया था, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इनका लाभ सही लोगों तक पहुंचे.

सरकार का क्या है उद्देश्य

अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार का मानना है कि कांशीराम आवास योजना के मकानों का सही उपयोग होना चाहिए. अगर कहीं अवैध कब्जा है, तो उसे हटाकर मकानों को फिर से जरूरतमंद परिवारों को दिया जाएगा. इस कदम से हजारों परिवारों को रहने के लिए घर मिल सकता है. कैबिनेट बैठक में लिए गए इन फैसलों को प्रशासनिक सुधार और सामाजिक कल्याण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. 

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