'डिजिटल अरेस्ट जैसा नहीं है कोई नियम', CM योगी ने साइबर धोखाधड़ी से जनता को किया सावधान, दी ये सलाह

साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को सावधान किया है. उन्होंने कहा कि देश में ऐसा कोई कानून नहीं है, जो डिजिटल गिरफ्तारी की अनुमति देता है. ऐसे में लोग साइबर ठगों के झांसे में न आए और ऐसी स्थिति के लिए तुरंत 1930 पर संपर्क करें.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (File Photo: ITG) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 05 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:34 AM IST

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को नागरिकों को साइबर फ्रॉड से सावधान किया. उन्होंने कहा कि देश में कहीं भी "डिजिटल अरेस्ट" जैसा कोई नियम नहीं है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीएम ने एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने साइबर क्राइम रोकने के तरीकों को काफी मज़बूत किया है और अब सभी 75 ज़िलों में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन काम कर रहे हैं.

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मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले, राज्य में सिर्फ़ दो साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन थे, लेकिन तब से सभी ज़िलों में खास साइबर यूनिट्स स्थापित की गई हैं. साथ ही हर पुलिस स्टेशन में साइबर हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं. मुख्यमंत्री ने लोगों को साइबर फ्रॉड से सावधान किया.

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उन्होंने कहा कि किसी भी कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' नाम का कोई प्रावधान नहीं है. पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों को गिरफ्तार नहीं करती है और न ही वे पैसे मांगते हैं. मुख्यमंत्री ने लोगों से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सावधान रहने का भी आग्रह किया और चेतावनी दी कि सार्वजनिक रूप से शेयर की गई तस्वीरों, वीडियो और लोकेशन की जानकारी का इस्तेमाल अक्सर अपराधी निजी जानकारी इकट्ठा करने के लिए करते हैं.

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साइबर अपराध से जुड़ी रिपोर्ट के लिए तुरंत 1930 पर करें संपर्क

नागरिकों को सलाह दी कि वे किसी के साथ भी अपनी निजी जानकारी या OTP शेयर न करें. साइबर अपराध से जुड़ी घटनाओं के लिए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करें. क्योंकि जितनी जल्दी पुलिस को सूचित किया जाएगा, रिकवरी की संभावना उतनी ही ज़्यादा होगी.

आपको बता दें कि सीएम की यह अपील साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों और कई ऐसी घटनाओं के बीच आई है. जिनमें कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर ठगों ने भोले-भाले नागरिकों से पैसे ऐंठने के लिए उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग तस्करी आदि के झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर "डिजिटल अरेस्ट" के तहत हिरासत में लिया था. 

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