महंगे प्ले-स्कूल को कहा 'ना'... IAS पुलकित गर्ग ने आंगनबाड़ी में कराया बेटी का एडमिशन, जमीन पर बैठ 'सिया' ने खाया खाना

DM Chitrakoot IAS Pulkit Garg Daughter: चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने अपनी बेटी सिया का दाखिला सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है. उन्होंने महंगे प्राइवेट स्कूलों के बजाय सरकारी व्यवस्था को चुनकर समाज के सामने समानता की मिसाल पेश की है.

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चित्रकूट की एक आंगनबाड़ी बनी 'सिया' का नया स्कूल.(Photo:Screengrab) चित्रकूट की एक आंगनबाड़ी बनी 'सिया' का नया स्कूल.(Photo:Screengrab)

संतोष बंसल

  • चित्रकूट,
  • 06 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:05 PM IST

DM Chitrakoot Pulkit Garg Daughter: जहां साधन संपन्न लोग अपने बच्चों को महंगे और आलीशान प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने को प्राथमिकता देते हैं, वहीं चित्रकूट के जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने अपनी साढ़े तीन साल की बेटी सिया का दाखिला चित्रकूट के जिला मुख्यालय  के समीप स्थित सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है.

उन्होंने ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरे जिले में नई चर्चा छेड़ दी है. उनके इस निर्णय को लोग सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर भरोसे की मजबूत पहल के रूप में देख रहे हैं. 

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IAS पुलकित गर्ग की बतौर जिलाधिकारी पहली तैनाती चित्रकूट में हुई है. पद संभालने के कुछ ही समय बाद उन्होंने अपनी बेटी के लिए एक उपयुक्त स्कूल की तलाश शुरू की.

एक जागरूक पिता की तरह उन्होंने निजी प्ले स्कलों के साथ-साथ कई आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा किया और पूरी जांच पड़ताल के बाद उन्हें जिला मुख्यालय में जिलाधिकारी आवास के पास ही स्थित आंगनबाड़ी केंद्र सबसे उपयुक्त लगा और उन्होंने अपनी बेटी का वहां पर एडमिशन करवा दिया. 

इस आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए व्यवस्थित गतिविधियां, पोषण, खेल सामग्री और सीखने का माहौल उपलब्ध है. इसी संतुष्टि के बाद उन्होंने अपनी बेटी सिया का नामांकन आंगनबाड़ी प्ले ग्रुप में कराना सबसे उपयुक्त लगा.

इस आंगनबाड़ी केंद्र में करीब 35 बच्चे हैं. सिया भी दूसरे बच्चों की तरह साथ बैठकर पढ़ाई करती है. मध्यान्ह भोजन के समय सबके साथ जमीन में बैठकर खाना खाती है. देखें VIDEO:- 

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सरकारी आंगनवाड़ी केंद्र में अपनी बेटी का एडमिशन करा कर IAS पुलकित गर्ग लोगों को यह महसूस करना चाहते हैं कि बच्चों की शुरुआती शिक्षा महंगे स्कूलों और बड़ी इमारतों से नहीं, बल्कि सही देखभाल और संस्कारों से मजबूत होती है. 

यह भी पढ़ें: दिल्ली से पढ़ीं BJP सांसद ने अपनी बेटी का गांव के सरकारी स्कूल में कराया एडमिशन, उमा भारती ने बताया आदर्श उदाहरण

आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को केवल अक्षर ज्ञान नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें मां की ममता जैसी देखभाल भी मिलती है. यहां छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है.

जहां पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में खेल-खेल में सीखने का वातावरण तैयार किया गया है. रंग-बिरंगी दीवारें, आकर्षक चित्र, खिलौने और खेल का मैदान बच्चों को आनंदित करते हैं. जबकि शैक्षिक किट, एबीसी और नंबर चार्ट बच्चों की समझ को मजबूत करते हैं.

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