आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आगरा के जीआईसी मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित किया. रैली का स्थान आखिरी समय पर बदले जाने के बावजूद हजारों कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ अपना शक्ति प्रदर्शन किया. इस कार्यक्रम में आजाद ने संभल हिंसा, यूजीसी नियमों में बदलाव और प्रयागराज के संत विवाद पर अपनी बेबाक राय रखी. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की ठोस नीतियों के साथ जनता के बीच जा रही है. बकौल चंद्रशेखर आजाद- 'मानवतावादी होने के नाते मैं स्पष्ट रूप से कह रहा हूं कि जो प्रयागराज में हुआ वो सरकार ने गलत किया है.'
शंकराचार्य विवाद और संविधान की दुहाई
प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए पुलिसिया व्यवहार पर आजाद ने सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि हालांकि वे मनुस्मृति और वर्ण व्यवस्था को मानने वाले विचारों से लाख असहमति रखते हैं, लेकिन एक 'संविधानवादी' होने के नाते वे हर व्यक्ति की धार्मिक आजादी (अनुच्छेद 25-26) का सम्मान करते हैं. उन्होंने प्रयागराज की घटना को मानवतावादी दृष्टिकोण से गलत बताया. आजाद ने विरोधियों को बाबा साहब अंबेडकर का संविधान पढ़ने की सलाह दी, जो सभी को बराबरी का अवसर देता है.
संभल विवाद और कानून व्यवस्था पर प्रहार
चंद्रशेखर आजाद ने संभल मामले का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों पर मुकदमे के आदेश के बाद जज का तबादला करना चिंताजनक है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने रैली को कमजोर करने के लिए अंतिम समय में स्थान परिवर्तन किया, फिर भी जनसैलाब उमड़ा. आजाद के अनुसार, अब उत्तर प्रदेश के कमजोर वर्ग का भरोसा अन्य दलों से टूटकर आजाद समाज पार्टी पर टिक गया है. उन्होंने वादा किया कि उनकी सरकार आने पर हर बेरोजगार को काम और किसानों को दोगुनी आय मिलेगी.
UGC नियमों का समर्थन और आंदोलन की चेतावनी
यूजीसी के बदले नियमों पर चल रहे विवाद को उन्होंने बेबुनियाद बताया. आजाद ने कहा कि विरोध वही कर रहे हैं जो बरसों से दलित बच्चों की शिक्षा की बलि देते आए हैं. उन्होंने रोहित वेमुला और पायल तड़वी का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने दबाव में आकर इन नियमों से पैर पीछे खींचे, तो 85 प्रतिशत लोग सड़कों पर आंदोलन करेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसी 'द्रोणाचार्य' को किसी 'एकलव्य' का अंगूठा काटने नहीं दिया जाएगा.
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