डिलीवरी बॉय के नाम पर करोड़ों का कारोबार? पैन कार्ड से हुआ खेल, अब घर आ रहे IT के नोटिस

बिजनौर में एक डिलीवरी बॉय के पैन कार्ड का दुरुपयोग कर करोड़ों का फर्जी कारोबार दिखाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. बिना जानकारी उसके नाम पर जीएसटी फर्म चलती रही और अब आयकर नोटिस से वह परेशान है. शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से पीड़ित मानसिक तनाव में है और न्याय की गुहार लगा रहा है.

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डिलीवरी बॉय के नाम पर करोड़ों का कारोबार (PhotoL itg) डिलीवरी बॉय के नाम पर करोड़ों का कारोबार (PhotoL itg)

ऋतिक राजपूत

  • बिजनौर,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक गरीब डिलीवरी बॉय के पैन कार्ड का दुरुपयोग कर उसके नाम पर करोड़ों रुपये का फर्जी कारोबार दिखा दिया गया. मामले में पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से वह मानसिक रूप से टूट चुका है.

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 Amazon में डिलीवरी बॉय है पीड़ित

प्राप्त जानकारी के अनुसार, धामपुर तहसील के ग्राम पृथ्वीपुर बनवारी निवासी फिरोज अहमद  Amazon में डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता है. उसके पैन कार्ड का इस्तेमाल करके साल 2020-21 में फर्जी तरीके से जीएसटी रजिस्ट्रेशन करा लिया गया. इस फर्जी फर्म का नाम 'WYN IMPEX' रखा गया और 14 जुलाई 2020 से इसका रजिस्ट्रेशन सक्रिय दिखाया गया.

साढ़े नौ करोड़ का लेनदेन हुआ तो...

हैरानी की बात यह है कि यहां जीएसटी पोर्टल पर अगले महीने अगस्त 2020 में ही 9 करोड़ 49 लाख 19 हजार 616 रुपये का फर्जी कारोबार दर्ज कर दिया गया, जबकि पीड़ित को इस लेन-देन की कोई जानकारी तक नहीं थी और न ही उसे कोई रकम प्राप्त हुई.

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब आयकर विभाग की ओर से फिरोज अहमद को नोटिस जारी किया गया. पहली बार नोटिस मिलने के बाद वह सकते में आ गया और जब उसने जीएसटी विभाग से जानकारी जुटाई तो पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ. इसके बाद 28 जून 2025 को आयकर विभाग द्वारा पुनः नोटिस जारी किया गया, जो उसे 3 जुलाई 2025 को प्राप्त हुआ.

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पीड़ित को लगातार मिल रहे नोटिस

जांच में सामने आया कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन के दौरान इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, दस्तावेज, एफिडेविट और हस्ताक्षर, पूरी तरह फर्जी हैं और इनका पीड़ित से कोई संबंध नहीं है.

पीड़ित फिरोज अहमद ने बताया कि वह एक गरीब मजदूर है और जन्म से अपने गांव में रह रहा है. उसने 13 अगस्त 2025 को इस मामले की शिकायत एसपी कार्यालय में भी की थी, लेकिन आरोप है कि न तो उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई हुई और न ही उसे रिसीविंग तक दी गई. लगातार मिल रहे नोटिस, आर्थिक और मानसिक दबाव तथा प्रशासनिक उदासीनता के चलते पीड़ित अब गहरे तनाव में है. 

यह मामला न सिर्फ पहचान की चोरी (Identity Theft) का गंभीर उदाहरण है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे की भी ओर इशारा करता है. अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक संज्ञान लेकर पीड़ित को न्याय दिलाता है.


 

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