यूपी के भदोही में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले एक सहायक अध्यापक को पुलिस ने पकड़ा है. आरोपी बीते करीब 14 साल से सरकारी स्कूल में तैनात होकर नौकरी कर रहा था. जांच में उसकी शैक्षणिक डिग्री फर्जी पाए जाने के बाद सेवा समाप्त कर दी गई और उसके खिलाफ केस दर्ज कराया गया.
मामला भदोही के डीघ विकास खंड अंतर्गत कंपोजिट विद्यालय कालिक मवैया का है. यहां सहायक अध्यापक के पद पर तैनात शैलेन्द्र कुमार के नियुक्ति संबंधी अभिलेखों की विभागीय जांच कराई गई. जांच के दौरान नियुक्ति में लगाए गए दस्तावेज संदिग्ध पाए गए. आगे सत्यापन में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के नाम से प्रस्तुत की गई डिग्री फर्जी पाई गई.
दस्तावेज फर्जी मिलने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर आरोपी शिक्षक की सेवा समाप्त कर दी गई. इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी ने कोइरौना थाने में आरोपी के खिलाफ अक्टूबर 2025 में एफआईआर दर्ज कराई. केस दर्ज होने के बाद से पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी थी.
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कोइरौना थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी शैलेन्द्र कुमार को थाना क्षेत्र के कटरा बाजार से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के मुताबिक, आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था. गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया.
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी वाराणसी के बड़ागांव थाना क्षेत्र के भटौली गांव का रहने वाला है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि फर्जी डिग्री के आधार पर उसने सरकारी नौकरी हासिल की और वर्षों तक वेतन भी उठाता रहा. अब यह भी जांच की जा रही है कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान और कौन-कौन लोग लापरवाही या मिलीभगत में शामिल रहे. नियुक्ति के दस्तावेजों के सत्यापन में यह मामला पकड़ा गया. विभाग अब अन्य रिकॉर्ड भी खंगाल रहा है. अधिकारियों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
महेश जायसवाल (भदोही)