उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस का मानवीय चेहरा देखने को मिला. पुलिस कमिश्नर ऑफिस में अपने मकान की शिकायत लेकर पहुंचे 80 वर्षीय बुजुर्ग के फटे जूतों को बदलकर नए जूते अपने हाथों से पहनाए. इस दौरान बुजुर्ग भावुक हो गए. इसके बाद बुजुर्ग ने कहा कि सिपाही भैया को मेरा आशीर्वाद है.
दरअसल, पुलिस कमिश्नर ऑफिस में सोमवार को 80 वर्षीय बुजुर्ग राजबहादुर अपने मकान की शिकायत लेकर पहुंचे थे. इस दौरान बुजुर्ग फटे जूते पहने हुए थे. यह देख कमिश्नर के गार्ड निशांत तोमर का दिल पसीज गया. बुजुर्ग अंदर एप्लीकेशन लेकर जब तक अधिकारियों से मिलते रहे तब तक सिपाही दौड़ कर कचहरी के पास एक जूते की दुकान से नया जूता खरीद लाया.
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बुजुर्ग को अपने हाथों से नए जूते पहनाए
बुजुर्ग जैसे ही शिकायत करके बाहर निकले, तो सिपाही निशांत तोमर हाथों में नए जूते लेकर बुजुर्ग के सामने खड़े थे. राजबहादुर जब तक कुछ समझ पाते, सिपाही दौड़ कर कुर्सी लाया और बुजुर्ग को बैठाकर अपने हाथों से उनके पुराने और फटे जूतों को उतारा और अपने हाथों से नए जूते पहना दिए. पुलिस कमिश्नर ऑफिस में जिसने भी इस नजारे को देखा वह सिर्फ एक ही शब्द कहता रह गया कौन कहता है पुलिस वालों में दिल नहीं होता.
मेरे पिता की तरह हैं बुजुर्ग- सिपाही
वहीं, सिपाही निशांत तोमर का कहना है कि बुजुर्ग राजबहादुर चार दिन पहले भी आए थे. तब इन के फटा जूता मैंने देखा था. मेरे मन में आया था कि मैं कुछ हेल्प करूं, लेकिन यह तुरंत चले गए थे. आज जैसे ही एप्लीकेशन लेकर आए अंदर गए, तो मुझे मौका मिल गया. मैं दौड़ कर जूते की दुकान से जूते ले आया और जूता पहना दिया. बुजुर्ग मेरे पिता की तरह हैं.
नए जूते खरीदने के पैसे नहीं थे मेरे पास- बुजुर्ग
बुजुर्ग राजबहादुर ने बताया कि उनके मकान पर कोई जबरदस्ती कब्जा करना चाहता है. इसी दौरान यह मानवीय पहल देखने को मिली है. मेरा आशीर्वाद है कि सिपाही भैया ने हमको पहनाया है. मेरे पास जूता खरीदने के पैसे नहीं थे. इसलिए नया जूता नहीं खरीदा था.
रंजय सिंह