लखनऊ-मिर्जापुर में बांग्लादेशी नागरिकों का पता चला, छापे पड़ने के बाद 180 गायब

लखनऊ और मिर्जापुर समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों का मामला सामने आया है. नगर निगम के सत्यापन अभियान के बाद 180 से अधिक सफाई कर्मचारी बिना वैध दस्तावेज के गायब हो गए, जिससे सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई. वहीं मिर्जापुर में चार बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी हुई है. इस कार्रवाई ने भर्ती और पहचान प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं और आगे भी जांच जारी है.

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180 से अधिक कर्मचारी अचानक काम छोड़कर फरार हो गए. Photo ITG 180 से अधिक कर्मचारी अचानक काम छोड़कर फरार हो गए. Photo ITG

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ ,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:38 PM IST

लखनऊ में लंबे समय से बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों के रहने की बात सामने आती रही है, और अब ऐसे ही मामले मिर्जापुर समेत उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों से भी सामने आने लगे हैं. नगर निगम द्वारा अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए गए सत्यापन अभियान के बाद, सफाई कार्यों में लगे कई ऐसे लोगों की पहचान हुई है जिनके पास वैध पहचान पत्र नहीं थे. जिनमें 180 कर्मचारी गायब है और निगम के सामने सफाई की दिक्कत खड़ी हो गई.

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लखनऊ में नगर निगम के सफाई कार्य में बिना उचित सत्यापन के लगे कई संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों ने अब काम छोड़ दिया है. नगर निगम के सूत्रों के अनुसार, सत्यापन अभियान के बाद 180 से अधिक कर्मचारी अचानक काम छोड़कर फरार हो गए. अनुमान है कि इस कार्रवाई का असर सफाई व्यवस्था पर भी पड़ा है और श्रमिकों की संख्या में करीब 15 प्रतिशत तक की कमी आई है. कई कर्मचारी या तो ड्यूटी से गायब हो गए हैं या फिर पहचान पर सवाल उठने के बाद वहां से हट गए हैं.

बताया जा रहा है कि नगर निगम द्वारा चलाई गई ड्राइव के दौरान कई कर्मचारियों से आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे अपने दस्तावेज पूरी तरह विभाग में प्रस्तुत नहीं कर सके. इसके बाद कई लोग अपने स्तर पर ही प्रदेश छोड़कर चले गए. इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की भर्ती और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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मिर्जापुर से 4 गिरफ्तार
इस बीच मिर्जापुर से भी एक अहम मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने चार बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि ये लोग लंबे समय से फर्जी या कूटरचित दस्तावेजों के सहारे अपनी असली पहचान छिपाकर वहां रह रहे थे और काम कर रहे थे. उनकी गिरफ्तारी के बाद यह आशंका और मजबूत हो गई है कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक बिना वैध दस्तावेजों के काम कर रहे थे.

इस पूरे घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक विभिन्न तरह के मजदूरी और श्रम कार्यों में बिना उचित पहचान सत्यापन के लगे हुए थे. हालिया कार्रवाई के बाद ऐसे कई लोगों की पहचान सामने आई है. इससे यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि लखनऊ और मिर्जापुर जैसे शहरों में वर्षों तक कितने अवैध विदेशी नागरिक नगर निकाय और सफाई से जुड़े कामों में लगे रहे और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी.

लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल के मुताबिक, नगर निगम लगातार बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन के लिए अभियान चला रहा है. उन्होंने कहा कि पहले चरण की ड्राइव में नगर निगम में कार्यरत कई कर्मचारियों से दस्तावेज मांगे गए थे, जिनमें से 180 कर्मचारी आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र प्रस्तुत नहीं कर सके और अपनी जगह छोड़कर फरार हो गए. मेयर ने कहा कि नगर निगम लगातार कागजात और दस्तावेजों की जांच कर रहा है और आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी.

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