उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जो समाज की सोच और व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. जिले का एक गांव अपने नाम की वजह से लंबे समय से सामाजिक तिरस्कार झेल रहा है. गांव का नाम है रूपवार तवायफ. इस नाम में जुड़ा तवायफ शब्द अब यहां के लोगों के लिए अभिशाप बन गया है.
ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव बाकी गांवों जैसा ही है, लेकिन जब भी बाहर किसी से परिचय होता है तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है. गांव के युवाओं का कहना है कि गांव का नाम उनके भविष्य में रुकावट बन रहा है. नौकरी के लिए आवेदन हो या किसी जगह पहचान बतानी हो, सरकारी दस्तावेजों में दर्ज यह नाम कई बार उन्हें अपमानित कर देता है.
सरकारी दस्तावेजों में दर्ज नाम बना परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि आधार कार्ड, पहचान पत्र और अन्य कागजातों में गांव का नाम इसी तरह दर्ज है. कई बार लोग पूछते हैं कि यह कैसा नाम है, जिससे उन्हें हिचकिचाहट होती है. खासतौर पर बेटियों के रिश्तों में भी यह नाम दीवार बन रहा है.
गांव वालों का मानना है कि यह नाम शायद पूर्वजों के समय किसी ऐतिहासिक कारण से जुड़ा होगा, लेकिन आज की पीढ़ी का उससे कोई संबंध नहीं है. यहां के बच्चे पढ़-लिखकर अफसर बनना चाहते हैं और सम्मान की जिंदगी जीना चाहते हैं.
प्रशासन से कई बार लगाई गुहार
ग्रामीणों ने कई बार जिला प्रशासन से गांव का नाम बदलने की मांग की है, लेकिन उनका आरोप है कि कागजी कार्रवाई में फाइलें दबकर रह जाती हैं. गांव के लोग चाहते हैं कि उन्हें शर्मिंदगी नहीं बल्कि सम्मान के साथ पहचान मिले.
अनिल अकेला