बागपत जनपद के काठा गांव में बीती रात को दिवंगत हवलदार हरेंद्र सिंह की बेटी प्राची की शादी थी. परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन बेटी के सिर पर पिता का साया नहीं था. ऐसे में शहीद हरेंद्र सिंह के फौजी साथियों ने यह तय किया कि उनकी बेटी की शादी में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी. शादी के दिन जब एक साथ कई फौजी वर्दी में गांव पहुंचे तो हर कोई हैरान रह गया. ये जवान कोई मेहमान नहीं, बल्कि दुल्हन के शहीद पिता के साथी थे.
फौजियों ने निभाई पिता की रस्में
21 जाट रेजिमेंट के कैप्टन, सूबेदार, नायब सूबेदार और हवलदार समेत कई सैनिक शादी की हर तैयारी में जुट गए. फौजियों ने न सिर्फ घराती और बारातियों की सेवा की, बल्कि शादी की सभी रस्मों को भी पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाया. मंडप में जब कन्यादान का समय आया तो जवानों ने पिता बनकर यह पवित्र रस्म निभाई. इतना ही नहीं, उन्होंने मिलकर बेटी के कन्यादान में 6 लाख 30 हजार रुपये का सहयोग भी दिया. 7 फेरों के दौरान फौजी साथी बेटी के साथ खड़े रहे और विदाई के समय भी वही दृश्य देखने को मिला जो किसी पिता की विदाई में होता है.
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दरअसल दिवंगत हवलदार हरेंद्र सिंह अरुणाचल प्रदेश में तैनात थे और 2020 में रिटायरमेंट लिया था. लेकिन एक सड़क हादसे में जान गंवा बैठे. उनके जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था, लेकिन उनके फौजी साथियों ने यह साबित कर दिया कि सेना में साथियों का रिश्ता सिर्फ ड्यूटी तक सीमित नहीं होता, बल्कि परिवार जैसा होता है.
परिवार ने क्या कहा?
दुल्हन की मां अमृता देवी ने बताया कि बेटी की शादी में फौजियों ने बहुत सपोर्ट किया. 6 लाख 10 हजार का कन्यादान दिया. शादी की सभी रस्में निभाई. वहीं दुल्हन के भाई हर्षित ने बताया कि मेरी बहन की शादी थी. जिसमे मेरे पापा की 21 जाट बटालियन से फौजी पहुंचे थे. सभी ने शादी की रस्में निभाई और पूरा साथ दिया.
मनुदेव उपाध्याय