मकर संक्रांति जब गुरु गोरखनाथ मंदिर के पट खुले, तो श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच एक चेहरा ऐसा भी दिखा, जिसने बीते कुछ समय से सुर्खियां बटोर रखी हैं. संभल हिंसा के बाद लगातार चर्चा में रहे और वर्तमान में फिरोजाबाद में एएसपी ग्रामीण अनुज चौधरी गुरु गोरखनाथ की शरण में पहुंचे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करने के बाद अनुज चौधरी को मंदिर परिसर में मूर्ति के ठीक दाहिनी ओर काली जैकेट पहने, हाथ जोड़कर खड़े देखा गया. मंदिर के पुजारियों ने उन्हें अक्षत और जल प्रदान किया.
संभल हिंसा से जुड़ा मामला फिर चर्चा में
अनुज चौधरी का नाम 24 नवंबर 2024 को संभल में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है. उस दिन हिंसा के दौरान गोली लगने से एक युवक के घायल होने के मामले में अदालत ने बड़ा आदेश दिया था. संभल के सीजेएम कोर्ट ने तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, तत्कालीन एसएचओ अनुज तोमर समेत 10–12 अन्य पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे. यह आदेश 9 जनवरी 2026 को आया, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई. याचिका नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय निवासी यामीन द्वारा दायर की गई थी. यामीन का आरोप है कि उनका बेटा मोहम्मद आलम 24 नवंबर 2024 को रस्क बेचने के लिए घर से निकला था, लेकिन शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में हिंसा के दौरान पुलिस की गोली से घायल हो गया.
पीड़ित परिवार का दावा और मेडिकल रिपोर्ट
याचिका में कहा गया है कि घायल आलम को पीठ में दो और हाथ में एक गोली लगी थी. परिवार का आरोप है कि संभल और मुरादाबाद के कई अस्पतालों में इलाज कराने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस दबाव के कारण इलाज नहीं हो सका. इसके बाद 26 नवंबर 2024 को आलम को मेरठ के एमसीसी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज हुआ. अदालत में पेश मेडिकल दस्तावेजों के मुताबिक, इलाज के दौरान आलम के शरीर से 32 बोर की गोली निकाली गई. ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर नवनीत गर्ग और हाथ की टूटी हड्डी में प्लेट डालने वाले डॉक्टर यूनुस आलम के बयान भी कोर्ट में दर्ज हुए. मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से ‘गन शॉट वाउंड’ की पुष्टि की गई.
पुलिस की दलील और कोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से दलील दी गई कि पुलिस 32 बोर की गोली का इस्तेमाल नहीं करती, इसलिए आलम पुलिस की गोली से घायल नहीं हुआ. वहीं, पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि अस्पताल में भर्ती के दौरान आलम ने कथित रूप से पड़ोसी विवाद में गोली लगने की बात कही थी. हालांकि कोर्ट ने कई अदालती आदेशों और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए कहा कि गोली किसने मारी, यह घायल व्यक्ति ही सबसे बेहतर तरीके से बता सकता है. चूंकि घायल आलम ने पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाए हैं, इसलिए एफआईआर दर्ज होना जरूरी है.
पुलिस का जवाब: आदेश के खिलाफ अपील
कोर्ट के आदेश के बाद संभल पुलिस ने साफ कर दिया कि सीजेएम के आदेश पर एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी. संभल एसपी केके बिश्नोई ने बयान जारी कर कहा कि यह आदेश गलत है और पुलिस इस मामले में उच्च अदालत में अपील करेगी. उनका कहना है कि हिंसा की जांच पहले ही हो चुकी है और जांच में पुलिस की कार्रवाई को सही पाया गया था. संभल पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सीजेएम के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की जाएगी और तब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी.
सियासी बयानबाजी तेज
इस बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एएसपी अनुज चौधरी को लेकर तीखी टिप्पणी की थी. उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश का जिक्र करते हुए लिखा, अब कोई बचाने नहीं आएगा… अखिलेश यादव ने आगे लिखा कि अब ऐसे पक्षपाती पुलिसकर्मी अकेले बैठकर सब कुछ याद करेंगे. उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए लिखा, भाजपा का फार्मूला नंबर 1: पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो. फार्मूला नंबर 2: भाजपाई किसी के सगे नहीं होते. उन्होंने एएसपी अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज होने की खबर को भी अपने पोस्ट में साझा किया, जिससे यह मामला और अधिक राजनीतिक रंग में आ गया.
खेल से पुलिस सेवा तक का सफर
अनुज चौधरी कोई साधारण पुलिस अधिकारी नहीं हैं. उन्होंने 2004 एथेंस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था. इसके अलावा 2002 और 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीत चुके हैं. उनके खेल करियर के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया. 2012 में उन्होंने स्पोर्ट्स कोटे से उत्तर प्रदेश पुलिस जॉइन की और अपनी अलग पहचान बनाई. खेल जगत से प्रशासनिक सेवा तक का उनका सफर प्रेरणादायक माना जाता रहा है, लेकिन संभल हिंसा के बाद उनका नाम विवादों से जुड़ गया.
गजेंद्र त्रिपाठी