'आज BJP समर्थक शर्म के मारे...', शराब घोटाले में केजरीवाल के बरी होने पर बोले अखिलेश यादव; शंकराचार्य का जिक्र कर कसा तंज

शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के बरी होने पर अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इसे सत्य की जीत और भाजपा के लिए 'नैतिक मृत्युदंड' बताया. अखिलेश ने कहा कि जो लोग शंकराचार्य तक पर झूठे आरोप लगा सकते हैं, वे किसी को भी बदनाम कर सकते हैं.

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अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल (File Photo) अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल (File Photo)

aajtak.in

  • लखनऊ ,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:53 PM IST

दिल्ली के चर्चित शराब घोटाला केस में पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कोर्ट ने बरी कर दिया है. इसको लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने रिएक्ट किया है. उन्होंने कहा कि आज दिल्ली के लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री  अरविंद केजरीवाल के साथ सत्य और न्याय दोनों खड़े हैं. आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता कि वो सच को आच्छादित कर ले. आज हर ईमानदार आशा भरी सांस लेगा और भाजपा के समर्थक शर्म के मारे घोर आत्म-लज्जित हो रहे होंगे. भाजपा ने दिल्ली के निवासियों से विश्वासघात किया है.

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शंकराचार्य विवाद के बहाने भी अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जो कपटजीवी सनातनी शंकराचार्य जी, साधु, संतों, संन्यासियों तक पर झूठे आरोप लगाने का महापाप करते हैं, वो भला किसी सरकार, दल या किसी व्यक्ति को बदनाम करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं, इसकी कल्पना कोई शरीफ आदमी कर ही नहीं सकता है. 

बकौल अखिलेश- 'आजादी से पहले, वर्तमान सत्ता के जो ‘संगी-साथी’ देश के दुश्मनों से मिले हुए थे और स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी के फंदों तक पहुंचाने के लिए, आजादी के दीवानों के खिलाफ मुख़बिरी जिनका काम रहा है और जो देश को गुलाम बनानेवाले साम्राज्यवादियों के माफी-वजीफे पर रहकर अपनी भूमिगत भूमिका निभाते रहे हैं, छल-छलावे के वो विचारवंशी भाजपाई, आज किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं. भाजपा के लिए ये समाचार किसी ‘नैतिक मृत्युदंड’ से कम नहीं है.'

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आपको बता दें कि दिल्ली के शराब घोटाले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया. कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा कि केवल बिना ठोस और पर्याप्त सबूत के लगाए गए आरोपों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. अदालत ने जांच एजेंसी के साक्ष्यों को कमजोर और अपर्याप्त पाते हुए दोनों नेताओं को राहत दी.

दूसरी ओर, सीबीआई इस फैसले से असंतुष्ट नजर आ रही है. जांच एजेंसी के वकीलों ने संकेत दिया है कि वे कोर्ट के आदेश का विस्तृत अध्ययन करने के बाद इसे उच्च न्यायालयमें चुनौती देंगे. इस फैसले को आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है.

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