महाकुंभ में पति को अघोरी के रूप में देख चौंक गई पत्नी, 27 साल पहले पटना से हुआ था गायब

महाकुंभ में एक परिवार को 27 साल पहले गुमा अपना परिवार का सदस्य मिल गया. हालांकि, वह शख्स अब 65 साल का हो चुका है और उसने अघोरी का रूप धारण कर रखा है. अघोरी बने शख्स ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया है, लेकिन परिवार ने उसके शरीर पर कुछ निशान देखकर दावा किया है कि वह उनका पारिवारिक सदस्य ही है.

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यह AI से बनाई गई तस्वीर है. इसका इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है. यह AI से बनाई गई तस्वीर है. इसका इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 9:26 AM IST

आपने अक्सर लोगों को एक दूसरे से मजाक करते सुना होगा. 'अरे कुंभ के मेले में बिछड़ गए थे क्या'. ठीक ऐसी ही कहानी झारखंड से सामने आई है. झारखंड के एक परिवार ने प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले में 27 साल बाद अपने खोए हुए सदस्य को खोज निकालने का दावा किया है.

1998 में हुए थे लापता 

परिवार का कहना है कि 1998 में लापता हुए गंगासागर यादव अब ‘अघोरी’ साधु बन चुके हैं, जिन्हें लोग बाबा राजकुमार के नाम से जानते हैं. उनकी उम्र 65 साल है. गंगासागर 1998 में पटना जाने के बाद अचानक लापता हो गए थे और उनकी कोई खबर नहीं मिल पाई थी. उनकी पत्नी धनवा देवी ने अकेले ही अपने दो बेटों, कमलेश और विमलेश को पाला.

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गंगासागर के छोटे भाई मुरली यादव ने बताया, 'हमने भाई को खोजने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन हाल ही में हमारे एक रिश्तेदार ने कुंभ मेले में एक साधु को देखा, जो गंगासागर जैसा दिखता था. उन्होंने उसकी तस्वीर खींचकर हमें भेजी. तस्वीर देखकर हम तुरंत धनवा देवी और उनके दोनों बेटों के साथ कुंभ मेले पहुंचे.'

बाबा राजकुमार ने दावा नकारा

परिवार का दावा है कि उन्होंने बाबा राजकुमार के रूप में अपने गंगासागर यादव को पहचाना, लेकिन साधु ने अपनी पुरानी पहचान को पूरी तरह नकार दिया. बाबा राजकुमार ने खुद को वाराणसी का साधु बताते हुए कहा कि उनका गंगासागर से कोई संबंध नहीं है. उनके साथ मौजूद एक साध्वी ने भी इस बात का समर्थन किया.

निशान देखकर परिवार ने किया दावा

हालांकि, परिवार ने उनके शरीर पर मौजूद कुछ विशेष पहचान चिह्नों को आधार बनाकर दावा किया कि वह ही गंगासागर हैं. उन्होंने उनके लंबे दांत, माथे पर चोट के निशान और घुटने पर मौजूद पुराना घाव दिखाते हुए कहा कि यह वही व्यक्ति है. परिवार ने कुंभ मेले की पुलिस से इस मामले में मदद मांगी है और डीएनए टेस्ट कराने की मांग की है, ताकी व्यक्ति की असली पहचान साबित की जा सके.

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DNA टेस्ट कराने की बात

भाई मुरली यादव ने कहा, 'हम कुंभ मेले के खत्म होने तक इंतजार करेंगे. अगर जरूरत पड़ी तो डीएनए टेस्ट करवाकर सच्चाई सामने लाएंगे. अगर टेस्ट में हमारा दावा गलत साबित हुआ तो हम बाबा राजकुमार से माफी मांग लेंगे.' फिलहाल, परिवार के कुछ सदस्य घर लौट चुके हैं, लेकिन कुछ अब भी कुंभ मेले में मौजूद हैं और बाबा राजकुमार पर नजर रख रहे हैं.

गंगासागर की गुमशुदगी के बाद उनका परिवार बुरी तरह टूट गया था. उनके बड़े बेटे की उम्र उस समय केवल दो साल थी. अब यह देखना बाकी है कि क्या DNA टेस्ट से सच सामने आएगा या यह परिवार वाकई किसी गलतफहमी का शिकार हो गया है.

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