यूपी के बस्ती जिले में आयोजित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का 'सनातन धर्म संवाद' कार्यक्रम विवादों में घिर गया है. पुलिस ने कार्यक्रम के मुख्य आयोजक व राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत पांडेय और उनके दो अन्य साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. ये कार्रवाई कार्यक्रम के पांच दिन बीत जाने के बाद हुई है.
कोतवाली पुलिस के मुताबिक, यह एक्शन कार्यक्रम में दिए गए भाषणों से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित प्रयोग को लेकर लिया गया है. गौर करने वाली बात यह कि प्रशांत पांडेय को कोविड महामारी गाइडलाइन का पालन न करने का भी आरोपी बनाया गया है. इसको लेकर जिला प्रशासन की सोशल मीडिया पर लोग जमकर ट्रोलिंग कर रहे हैं.
दरअसल, बीते 29 मार्च को जिले के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सानिध्य में 'सनातन धर्म संवाद' का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम की कमान प्रशांत पांडेय संभाल रहे थे. आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं द्वारा दिए गए कुछ भाषणों की भाषा मर्यादित नहीं थी, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्यता फैलने की आशंका जताई गई. लेकिन सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि कार्यक्रम के आयोजकों को कोरोना महामारी के गाइडलाइन का पालन न करने का भी आरोपी बनाया गया है.
इसको लेकर आरोपी प्रशांत पाण्डेय ने तंज कसते हुए हुए कहा कि देश के कई राज्यों में चुनाव हो रहे हैं और प्रचार-प्रसार भी चल रहा है. पीएम से लेकर सीएम और मंत्री तक बड़ी-बड़ी रैली संबोधित कर रहे हैं मगर वहां कोविड गाइडलाइन का कोई पालन नहीं हो रहा. उन्होंने कहा कि ये FIR सिर्फ और सिर्फ द्वेषपूर्ण तरीके से की गई है. फिर भी हम सभी इसका सामना करेंगे.
बता दें कि मामले ने तब तूल पकड़ा जब उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ला ने कार्यक्रम के दो दिन बाद एक प्रेस वार्ता के दौरान इस कार्यक्रम और इसके आयोजकों पर सवाल उठाए. उनके कड़े रुख के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई और अंत में राजनैतिक दबाव में पुलिस ने कोतवाली थाना प्रभारी की तहरीर पर कानूनी शिकंजा कस दिया.
वहीं, इस पूरे मामले में डिप्टी एसपी सदर सत्येंद्र भूषण तिवारी ने बताया कि जिले में कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना प्राथमिकता है. किसी भी व्यक्ति या संगठन को धर्म के नाम पर सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से विवेचना कर रही है और कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है.
एफआईआर में तेज ध्वनि और भड़काऊ भाषण को आधार बनाया गया है. ध्वनि प्रदूषण को लेकर नियम सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट हैं, जिनका पालन कराना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है. वैमनस्यता फैलाने वाले भाषण से समाज में विघटन होता है जिसे रोकना प्राथमिकता है.
संतोष सिंह