बॉस ने नहीं दी प्रेग्नेंसी लीव, बच्चे की हुई मौत, ऑफिस देगा इतना करोड़ जुर्माना

अमेरिका में एक कामकाजी महिला को प्रेग्नेंसी के दौरान घर से काम करने की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद उसके नवजात शिशु की मौत हो गई. कोर्ट ने कंपनी को 22.5 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया, जिससे कामकाजी महिलाओं की समस्याओं पर फिर बहस छिड़ गई.

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मजबूरी में चेल्सी को डॉक्टर की सलाह के खिलाफ जाकर ऑफिस जाना पड़ा. ( Photo: Pexels) मजबूरी में चेल्सी को डॉक्टर की सलाह के खिलाफ जाकर ऑफिस जाना पड़ा. ( Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:35 PM IST

 

आज के समय में महिलाएं ऑफिस और घर दोनों जिम्मेदारियों को साथ लेकर चल रही हैं. लेकिन कई बार यह बैलेंस इतना मुश्किल हो जाता है कि उन्हें अपनी सेहत और परिवार तक के साथ समझौता करना पड़ता है. ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला अमेरिका से सामने आया है, जिसने कामकाजी महिलाओं की मुश्किलों को उजागर कर दिया है. ओहियो की रहने वाली चेल्सी वॉल्श एक कंपनी में काम करती थीं. साल 2021 में वह प्रेग्नेंट थीं और उनकी प्रेग्नेंसी काफी हाई रिस्क थी. डॉक्टरों ने उन्हें सख्त आराम करने और घर से काम करने की सलाह दी थी.

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कंपनी ने नहीं मानी बात
चेल्सी ने अपनी कंपनी से घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने की अनुमति मांगी, ताकि वह अपनी सेहत का ध्यान रख सकें और नौकरी भी जारी रख सकें. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने उनके इस रिक्वेस्ट को ठुकरा दिया. उन्हें साफ कहा गया कि या तो ऑफिस आकर काम करें या फिर बिना वेतन के छुट्टी लें, जिससे उनकी सैलरी और हेल्थ इंश्योरेंस दोनों बंद हो सकते थे. मजबूरी में चेल्सी को डॉक्टर की सलाह के खिलाफ जाकर ऑफिस जाना पड़ा.

सेहत पर पड़ा भारी असर
चेल्सी ने 22 फरवरी को फिर से ऑफिस से काम शुरू किया. लगातार तीन दिन तक काम करने के बाद 24 फरवरी की शाम को उन्हें अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. उसी दिन उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन दुखद बात यह रही कि जन्म के कुछ ही घंटों बाद बच्ची की मौत हो गई. बच्ची समय से पहले पैदा हुई थी और उसकी हालत बहुत नाजुक थी. सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि कंपनी ने चेल्सी के घर से काम करने के अनुरोध को उसी दिन मंजूरी दी, जिस दिन उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई—लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

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परिवार ने किया केस
इस घटना के बाद चेल्सी के परिवार ने कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया. उनका आरोप था कि अगर कंपनी समय पर वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दे देती, तो शायद यह हादसा टल सकता था. कोर्ट में सुनवाई के बाद जूरी ने कंपनी को दोषी पाया. अदालत ने कंपनी को 22.5 मिलियन डॉलर (करीब 180 करोड़ रुपये) का हर्जाना देने का आदेश दिया. जूरी ने माना कि कंपनी ने एक उचित और जरूरी मांग को ठुकराया, जिसका सीधा असर महिला और उसके बच्चे पर पड़ा.

महिलाओं की असली चुनौती
यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि उन लाखों कामकाजी महिलाओं की हकीकत दिखाता है जो रोज ऐसी परेशानियों का सामना करती हैं. आज भी कई जगहों पर महिलाओं को अपनी स्थिति समझाने के बाद भी जरूरी सहूलियत नहीं मिलती.

क्यों जरूरी है बदलाव?
यह घटना बताती है कि कंपनियों को अपने कर्मचारियों, खासकर महिलाओं की जरूरतों को समझना कितना जरूरी है. महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्प, प्रेग्नेंसी के दौरान विशेष सुविधा और हेल्थ और सेफ्टी को प्राथमिकता देनी चाहिए. ये सभी चीजें सिर्फ सहूलियत नहीं, बल्कि जरूरत हैं.

चेल्सी वॉल्श का मामला बेहद दुखद है, लेकिन यह एक बड़ी सीख भी देता है. आज के दौर में जब महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, तब उन्हें सुरक्षित और सहयोगी माहौल देना बेहद जरूरी है. यह घटना हमें याद दिलाती है कि काम से ज्यादा जरूरी इंसान की सेहत और जीवन होता है. अगर समय पर सही फैसले लिए जाएं, तो कई ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है.

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