'वर्क प्रेशर से लोग गे बन रहे हैं...' मलेशिया के मंत्री का अजीब दावा, लोग पूछ रहे- ये कैसे संभव है?

क्या काम का दबाव किसी को 'गे बना सकता है? यह अजीब दावा किसी आम इंसान ने नहीं, बल्कि मलेशिया के एक मंत्री ने किया है. अपने इस बयान के बाद अब वे सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स के निशाने पर आ गए हैं

Advertisement
मलेशिया में समलैंगिकता अपराध है (Photo:X/@DrZulkifliHasan and pexel) मलेशिया में समलैंगिकता अपराध है (Photo:X/@DrZulkifliHasan and pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:46 PM IST

मलेशिया के एक वरिष्ठ मंत्री का संसद में दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय (धार्मिक मामलों) के मंत्री डॉ. ज़ुल्किफ्ली हसन ने अपने लिखित जवाब में दावा किया कि वर्क-स्ट्रेस, सामाजिक माहौल और धार्मिक प्रथाओं की कमी लोगों को LGBT समुदाय की ओर धकेल सकती है.मत्री ने यहां तक कह दिया कि काम का दबाव लोगों को गे बना रहा है. बयान सामने आते ही लोगों ने उनकी जमकर आलोचना की और सोशल मीडिया पर खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है.

Advertisement

संसद में क्या कहा गया?

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्री का यह बयान तब सामने आया जब विपक्षी पार्टी PAS की सांसद सिती जइलाह मोहद यूसुफ ने उनसे संसद में सवाल किया. अपने लिखित जवाब में हसन ने कहा कि सामाजिक माहौल, यौन अनुभव, काम से जुड़ा तनाव और व्यक्तिगत कारण इन सभी को LGBT व्यवहार के संभावित कारणों के तौर पर देखा जा सकता है.

मंत्री का यह बयान उस संसदीय जांच का हिस्सा था, जिसमें LGBT समुदाय से जुड़े रुझानों, उम्र, जातीयता और कारणों पर अध्ययन किया जा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि 2022 से 2025 के बीच LGBT गतिविधियों से जुड़े 135 मामले सामने आए, जिनमें गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की गई.  मलेशिया में समलैंगिकता अपराध है

'मेरी पूरी ऑफिस टीम अब तक गे क्यों नहीं हुई'

Advertisement

बयान सामने आते ही मलेशिया में ऑनलाइन यूजर्स फट पड़े. सोशल मीडिया पर एक से बढ़कर एक तंज देखने को मिले.एक यूजर ने लिखा कि अगर वर्क-स्ट्रेस से लोग गे होते हैं तो हैरानी है कि मेरी पूरी ऑफिस टीम अब तक गे क्यों नहीं हुई!दूसरे ने लिखा कि मैं रोज तनाव में रहता हूं... शायद बाइसेक्शुअल होने की कगार पर हूं!

4-डे वर्क वीक लागू करो… ताकि 'कम लोग गे' हों.

तीसरे यूजर ने मजाक में कहा कि वर्क-स्ट्रेस इतना खतरनाक है, इसलिए मैं कम घंटे काम करने की बात को सपोर्ट करता हूं! कुछ लोगों ने इस बयान का इस्तेमाल बेहतर वर्क-कल्चर की मांग के लिए किया.अगर सरकार तनाव कम करना चाहती है, तो वेतन बढ़ाओ, महंगाई घटाओ और 4-डे वर्क वीक लागू करो… ताकि 'कम लोग गे' हों.

मानवाधिकार संगठनों ने क्या कहा?

LGBTQ अधिकार समूहों ने मंत्री के बयान को भ्रामक और वैज्ञानिक आधारहीन बताया.Justice for Sisters समूह की थिलगा सुलथिरेह ने कहा कि यौन रुझान मानव पहचान का प्राकृतिक हिस्सा है.यह तनाव या बाहरी दबाव से नहीं बदलता.ऐसे बयान यह गलत धारणा फैलाते हैं कि LGBT पहचान 'ठीक' या 'बदली' जा सकती है, जो पूरी तरह गलत है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement