कॉरपोरेट नौकरी छोड़ना आसान फैसला नहीं होता. अच्छी सैलरी, तयशुदा जिंदगी और सुरक्षा.इन सबको छोड़ने के लिए बड़ी वजह चाहिए. लेकिन एक स्पेन की महिला ने ऐसा किया और अब उसकी कहानी इंटरनेट पर वायरल हो रही है.
यह मामला रोची (Rochi) नाम की एक कंटेंट क्रिएटर का है, जो पहले कॉरपोरेट सेक्टर में काम करती थीं. अब वह इंस्टाग्राम पर वर्क-लाइफ बैलेंस से जुड़ा कंटेंट बनाती हैं. हाल ही में उन्होंने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने बताया कि वह दोगुनी सैलरी मिलने पर भी कॉरपोरेट नौकरी में वापस क्यों नहीं जाएंगी.
क्या था छोड़ने का कारण
रोची ने साफ कहा कि उन्होंने नौकरी पैसे की वजह से नहीं छोड़ी थी. उनके मुताबिक, अब उनकी सुबह पहले जैसी नहीं होती. पहले जहां वह तनाव के साथ उठती थीं, अब सुकून के साथ दिन की शुरुआत करती हैं.
उन्होंने बताया कि कॉरपोरेट लाइफ में वह खुद को बदलकर जी रही थीं. मैं अलग तरह से मुस्कुराती थी, अलग तरह से बात करती थी. उन्होंने लिखा. यह सब उन्हें थका देता था.
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जिंदगी में क्या बदला
उन्होंने यह भी बताया कि अब असफलता का मतलब बदल गया है. पहले यह सिर्फ काम और टारगेट से जुड़ी होती थी, लेकिन अब यह उन्हें सीखने का मौका देती है.साथ ही, उन्होंने कहा कि अब वह तय करती हैं कि अपनी ऊर्जा कहां खर्च करनी है. न कोई टॉक्सिक मैनेजर, न मजबूरी में निभाने वाले रिश्ते.
लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि अगर डबल सैलरी ऑफर हो जाए तो? जैसे मैंने नौकरी सिर्फ पैसों के लिए छोड़ी हो. लेकिन सच यह है कि वजह पैसे नहीं थे. और यही कारण है कि कोई भी रकम मुझे वापस नहीं खींच सकती.
1. सुबह की कीमत समझ आ गई
पहले मेरी सुबह डर और तनाव से शुरू होती थी. अलार्म, भागदौड़ और किसी और की डेडलाइन का दबाव. अब मैं उठती हूं तो पहला ख्याल सुकून का होता है. यह एहसास किसी भी सैलरी से बड़ा है.
2. 8 घंटे किरदार निभाना बंद किया
कॉरपोरेट में मैं अलग तरह से मुस्कुराती थी, अलग तरह से बात करती थी. जैसे खुद नहीं, कोई और बनकर जी रही हूं. यह थकाने वाला था, लेकिन तब एहसास नहीं हुआ. अब साफ है, पैसे के लिए फिर से वह किरदार नहीं निभाऊंगी.
3. अब असफलता का मतलब बदल गया
पहले फेल होना सिर्फ किसी प्रोजेक्ट या KPI से जुड़ा था. अब जब असफल होती हूं, तो वह मेरी अपनी होती है. ज्यादा दर्द होता है, लेकिन उससे सीख भी मिलती है. पहले असफलता बर्नआउट की तरफ ले जाती थी, अब आगे बढ़ाती है.
4. अब तय करती हूं ऊर्जा कहां खर्च होगी
न टॉक्सिक मैनेजर, न थका देने वाले सहकर्मी. न ही मजबूरी में निभाने वाले रिश्ते. अब मैं तय करती हूं कि अपनी ऊर्जा किसे देनी है.
5. आजादी की कीमत चुका चुकी हूं
डर वाले महीने, खाली बैंक अकाउंट, रात के 3 बजे की बेचैनी… मैंने यह सब झेला है. उसी की कीमत पर यह आजादी मिली है. अब वापस जाना सिर्फ गलत फैसला नहीं होगा, बल्कि उस सफर का अपमान होगा.
डबल सैलरी? आप उतना नहीं दे सकते, जितना मुझे खोना पड़ेगा.
अगर आप भी अपनी जिंदगी की दिशा बदलने के बारे में सोच रहे हैं, खासकर 30s में, तो यह कहानी आपको जरूर सोचने पर मजबूर करेगी.
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने खुद को इससे जोड़कर देखा. कुछ यूजर्स ने कहा कि उन्होंने भी कॉरपोरेट छोड़ने के बाद जिंदगी में बड़ा बदलाव महसूस किया.वहीं कई लोगों ने रोची के फैसले की तारीफ की और कहा कि हर कोई ऐसा कदम नहीं उठा पाता.
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