जब दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी से हुई चूक.. मोसाद को किसने कब-कब दिया चकमा

मिडिल ईस्ट में बढ़ी हलचल है. हालिया घटनाओं जैसे पेजर हमला, नसरुल्लाह पर हवाई हमला, और हमास के कमांडरों पर हमले के पीछे मोसाद का हाथ माना जा रहा है. इस वक्त पूरी दुनिया की नजरें इसराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर टिकी हुई हैं.

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मोसाद को किसने कब-कब दिया चकमा-Representative Image-AI मोसाद को किसने कब-कब दिया चकमा-Representative Image-AI

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 12:16 PM IST

मिडिल ईस्ट में हलचल बढ़ी हुई है. हालिया घटनाओं जैसे पेजर हमला, नसरुल्लाह पर हवाई हमला, और हमास के कमांडरों पर हमले के पीछे मोसाद का हाथ माना जा रहा है. इस वक्त पूरी दुनिया की नजरें इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर टिकी हुई हैं. हालांकि, यह सच है कि मोसाद ने कई महत्वपूर्ण और सफल मिशन अंजाम दिए हैं, लेकिन यह एजेंसी हमेशा सफल नहीं रही है.

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इतिहास में कई बार ऐसे हालत भी आईं जब मोसाद को असफलता का सामना करना पड़ा और उसे घुटनों पर भी आना पड़ा. आइये जानते हैं मोसाद की फेलियर की कहानी.

खालिद मशाल की कहानी...

खालिद मशाल, हमास के नए नेता के रूप में उभर रहा था. इजरायल के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके थे. साल 1997 में, मोसाद ने उन्हें मारने की साजिश रची. मोसाद के एजेंट जॉर्डन की राजधानी अम्मान में मशाल के ऑफिस के बाहर घात लगाए बैठे थे. प्लान था कि खालिद को जहर का इंजेक्शन देकर उनकी हत्या कर दी जाए. ऐसा उन्होंने कर भी दिया. उसी वक्त खालिद मशाल के सुरक्षा गार्ड ने मोसाद एजेंटों को पकड़ लिया गया.

इस नाकाम हमले की खबर जैसे ही फैली, जॉर्डन के तत्कालीन राजा हुसैन को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने इजरायल को साफ चेतावनी दी. राजा हुसैन ने धमकी दी कि अगर इजरायल ने जहर का एंटीडोट नहीं सौंपा, तो वह मोसाद एजेंटों को फांसी पर लटका देंगे. यह धमकी इजरायल के लिए बड़ा सिरदर्द बन गई, और आखिरकार इजरायल को मजबूरी में एंटीडोट देना पड़ा, जिससे खालिद मशाल की जान बचाई जा सकी.

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यह घटना दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई. मशाल की छवि एक मजबूत नेता के रूप में उभर कर सामने आई, जो मोसाद के घातक हमले से भी बच निकले.

एक और हमास लीडर को मारने में चूके

2003 का साल था. मोसाद एक बार फिर हमास के प्रमुख नेता महमूद अल-जहर को निशाना बनाने के लिए तैयार थी. अल-जहर, जो हमास के सबसे बड़े कमांडरों में से एक था. मोसाद ने गुप्त इंटेलिजेंस के जरिये महमूद अल-जहर के घर का पता लगाया. उनकी हत्या की योजना बनाई. अल-जहर के घर को निशाना बनाकर घातक हमला किया गया, लेकिन इस बार भी मोसाद अपने मिशन में नाकाम रही.

महमूद अल-जहर इस जानलेवा हमले से बच निकले, लेकिन इस हमले में उनकी पत्नी और बेटे सहित कई निर्दोष लोगों की जान चली गई. यह ऑपरेशन इजरायल के लिए नाकाम साबित हुआ, और साथ ही इसने हमास के नेताओं पर हो रहे हमलों की क्रूरता को भी उजागर किया.

जब बेकसूर वेटर की जान ले ली मोसाद एजेंट ने

1973 का लिलीहैमर कांड मोसाद की सबसे बड़ी फेलियर में से एक था. जिसने उनकी खुफिया कार्यप्रणाली की संवेदनशीलता को सामने लाया. म्यूनिख ओलंपिक में इजरायली एथलीटों की हत्या के बाद, इजरायल ने ब्लैक सितंबर के मास्टरमाइंड अली हसन सलामेह को मारने का मिशन शुरू किया.

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मोसाद के एजेंटों ने नॉर्वे के लिलीहैमर में गलती से अहमद बुशिकी, एक मोरक्कन वेटर को सलामेह समझ लिया उसकी हत्या कर दी. जब असलियत सामने आई,नॉर्वे की पुलिस ने मोसाद के एजेंटों को गिरफ्तार कर लिया, जिससे इजरायल की अंतरराष्ट्रीय छवि को गहरा धक्का पहुंचा.

7 अक्टूबर 2023 को जब मोसाद हुआ फेल

7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर किया हमला उसके लिए बड़ा छवि पर बड़ा दाग था. मोसाद और इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक फेलियर केतौर में देखा गया. हमास के लड़ाकों ने गजा बॉर्डर को पार करते हुए इजरायल पर अचानक हमला किया. जिसमें इजरायली अधिकारियों के मुताबिक करीब 1200 लोग मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर नागरिक थे. इस हमले में हमास ने लगभग 251 लोगों को बंधक बना लिया.

इस हमले की पूर्व जानकारी न होना मोसाद और इजरायल की अन्य खुफिया एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ी चूक के रूप में देखा गया. मोसाद, जो अपने सटीक और एडवांस्ड इंटेलिजेंस सिस्टम के लिए जाना जाता है.

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