सिगरेट वालों का क्या कसूर था...! बजट में बीड़ी सस्ती हुई तो लोगों ने ऐसे लिए मजे!

सोशल मीडिया पर बजट को लेकर मीम्स बनना शुरू हो गए. कई यूजर्स ने मिडिल क्लास के दर्द को सामने लाया और कुछ ने पूछा कि आखिर बीड़ी सस्ती क्यों कर दी गई और सिगरेट ही क्यों मंहगी हुई.

Advertisement
सरकार ने सिगरेट और तंबाकू जैसे हानिकारक उत्पादों पर जीएसटी बढ़ाकर 40% कर दिया है (Photo: Social Media) सरकार ने सिगरेट और तंबाकू जैसे हानिकारक उत्पादों पर जीएसटी बढ़ाकर 40% कर दिया है (Photo: Social Media)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:13 PM IST

हर साल की तरह इस बार भी बजट स्पीच खत्म होते ही सोशल मीडिया पर हलचल मच गई. इस बार भी मीम्स, पोस्ट और कमेंट्स की बाढ़ आ गई. किसी ने खुशी जताई, किसी ने नाराजगी, तो कुछ लोग समझ ही नहीं पाए कि सरकार ने ये फैसले आखिर क्यों लिए. खासकर तंबाकू और सिगरेट वाले फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर खूब बहस छिड़ गई. नाराजगी इस बात को लेकर भी दिखी कि सिगरेट के दाम इतना क्यों बढ़ा दिए गए और बीड़ी को आखिर बख्श क्यों दिया गया.

Advertisement

सरकार ने सिगरेट और तंबाकू जैसे हानिकारक उत्पादों पर जीएसटी बढ़ाकर 40% कर दिया है. वहीं बीड़ी पर जीएसटी घटाकर 18% की स्लैब में डाल दिया गया है. बीड़ी बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेंदू पत्ते पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है. यानी तस्वीर साफ है-बीड़ी तो सस्ती हो गई, लेकिन सिगरेट और तंबाकू महंगे होने जा रहे हैं.

अब सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठ रहा है कि जब दोनों ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, तो सिगरेट पर इतनी सख्ती और बीड़ी पर इतनी नर्मी क्यों? क्या सिगरेट ज्यादा हानिकारक है और बीड़ी नहीं? या फिर यह फैसला किसी और वजह से लिया गया? 

इन सबके बीच मीम्स की बाढ़ छाई रही. किसी ने सिगरेट पीने वालों का रोना-धोना दिखाया, किसी ने बीड़ी वालों के 'बच जाने' पर मजाक उड़ाया. कई मीम्स ऐसे भी थे जो बजट फैसले को लेकर सरकार से सवाल पूछते दिखे.

Advertisement

आइये देखते हैं कुछ मजेदार दिलचस्प मीम और पोस्ट जो इस फैसले के इर्द-गिर्द बनें.

सिगरेट स्मोकर का दर्द

सिगरेट पीने वालों का हाल!

 

 

 

क्या इस वजह से सस्ती हुई बीड़ी

बीड़ी पर जीएसटी में कटौती के पीछे सरकार का उद्देश्य घरेलू बीड़ी उद्योग को राहत देना माना जा रहा है. ट्रेड यूनियनों के अनुसार, इस उद्योग में 60 से 70 लाख लोग काम करते हैं, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक है. श्रम और रोजगार मंत्रालय के आंकड़े भी बताते हैं कि देश में करीब 40 लाख लोग सीधे तौर पर बीड़ी उद्योग से जुड़े हुए हैं. ऐसे में टैक्स का बोझ कम करने को रोजगार बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement