जर्मनी में काम करने को लेकर भारतीयों के बीच एक खास छवि बनी हुई है, जहां बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और प्रोफेशनल माहौल की उम्मीद की जाती है. लेकिन हाल ही में मोनिका नाम की एक भारतीय महिला ने अपने अनुभव साझा कर इस धारणा पर नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर बताया कि जर्मनी का वर्क कल्चर बाहर से जितना परफेक्ट दिखता है, असल में उससे काफी अलग है.
मोनिका के अनुसार, जर्मनी में करियर ग्रोथ तेज नहीं बल्कि धीमी और स्थिर होती है. यहां प्रमोशन एक तय संरचना और समय के अनुसार मिलते हैं, न कि अचानक तेजी से आगे बढ़ने के रूप में. सैलरी में बढ़ोतरी भी सीमित रहती है और नौकरी बदलने पर भी अपेक्षा के अनुसार बड़ा उछाल देखने को नहीं मिलता.
'यहां जिम्मेदारियां धीरे-धीरे बढ़ती हैं'
उन्होंने बताया कि जर्मनी में सिर्फ अच्छा काम करना काफी नहीं होता, बल्कि अपने काम की सही लोगों तक जानकारी पहुंचाना भी जरूरी होता है. लगातार प्रदर्शन को अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि अलग दिखने से ज्यादा स्थिरता पर जोर होता है. फीडबैक भी कम मिलता है और अक्सर इसका मतलब यही होता है कि काम ठीक चल रहा है. यहां जिम्मेदारियां धीरे-धीरे बढ़ती हैं, लेकिन पदनाम बदलने में समय लगता है.
नौकरी बदलने को लेकर भी उन्होंने एक अहम बात बताई. जर्मनी में नोटिस पीरियड लंबा होता है, इसलिए किसी भी बदलाव के लिए महीनों पहले योजना बनानी पड़ती है. साथ ही कर्मचारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने काम की जिम्मेदारी खुद लें और बिना निर्देश के कार्य करें.
देखें मोनिका का इंस्टा पोस्ट
यहां करियर की रफ्तार धीमी
मोनिका ने यह भी कहा कि जर्मनी का वर्क कल्चर काफी हद तक व्यवस्थित और दस्तावेजों पर आधारित होता है. अगर कोई चीज लिखित में नहीं है, तो उसे मान्यता नहीं मिलती. वहीं, नई स्किल्स सीखना भी व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी मानी जाती है.
वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर उन्होंने बताया कि जर्मनी में काम के घंटे सख्ती से तय होते हैं और समय पर ऑफिस छोड़ना सामान्य माना जाता है. इससे तनाव कम रहता है, लेकिन इसके साथ ही करियर की रफ्तार भी धीमी हो जाती है.
अपने अनुभव को समेटते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ लोग तेज तरक्की की बजाय स्थिरता को महत्व देने लगते हैं. यह सिस्टम न तो बेहतर है और न ही खराब, बल्कि काम करने का एक अलग तरीका है.
इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी. कई लोगों ने इसे सटीक बताते हुए कहा कि धीमी ग्रोथ के साथ स्थिरता की बात सही है, वहीं कुछ ने माना कि कम तनाव वाली जिंदगी ज्यादा संतुलित होती है.
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