छोटा कॉलेज, बड़ा सपना...लड़की ने बताया कैसे मिली गूगल की हाई-प्रोफाइल जॉब

एक युवा टेक इंजीनियर ने सोशल मीडिया पर अपनी लंबी जर्नी साझा की है, जिसमें टीयर-3 कॉलेज से शुरू हुआ सफर आखिरकार उन्हें गूगल की प्रतिष्ठित नौकरी तक ले गया. उन्होंने पोस्ट में बताया कि टेक करियर में चुनौतियों को पार करने के लिए लगातार मेहनत और धैर्य सबसे बड़ा हथियार होते हैं.

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आर्ची ने 2017 में भोपाल के एक टीयर-3 इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया(Photos: @archy.gupta/Instagram) आर्ची ने 2017 में भोपाल के एक टीयर-3 इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया(Photos: @archy.gupta/Instagram)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:04 PM IST

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक युवा टेक इंजीनियर की कहानी तेजी से वायरल हो रही है. टीयर-3 कॉलेज से पढ़ने वाली सॉफ्टवेयर इंजीनियर आर्ची गुप्ता ने इंस्टाग्राम पर अपनी मेहनत और संघर्ष से भरी जर्नी साझा की है. उनकी पोस्ट पढ़कर कई छात्र और इंजीनियर प्रेरित हो रहे हैं.आर्ची ने लिखा कि लगातार मेहनत करना कभी-कभी उबाऊ लग सकता है, लेकिन यही मेहनत समय के साथ बड़ा नतीजा देती है.

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शुरुआत एक छोटे कॉलेज से

आर्ची ने 2017 में भोपाल के एक टीयर-3 इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया. कॉलेज में प्लेसमेंट बहुत सीमित थे. कुछ ही सर्विस-बेस्ड कंपनियां आती थीं. अवसर कम थे, लेकिन उन्हें विश्वास था कि वह इन सीमाओं से आगे बढ़ सकती हैं.ऑन-कैंपस और ऑफ-कैंपस, दोनों तरह के इंटरव्यू में उन्होंने हिस्सा लिया. दूसरे शहरों में होने वाले मौकों को भी उन्होंने नहीं छोड़ा. हर इंटरव्यू उनके लिए सीखने का मौका था.

पहली नौकरी मिली, पर लक्ष्य बड़ा था

फाइनल ईयर में उन्हें एक सर्विस-बेस्ड कंपनी में नौकरी मिल गई. लेकिन उनका लक्ष्य इससे बड़ा था. उन्होंने अपनी तैयारी दोबारा शुरू की. डीएसए, डेटाबेस और कंप्यूटर फंडामेंटल्स को उन्होंने गहराई से पढ़ा.इसी समय उन्हें ओपनटेक्स्ट में इंटर्नशिप का मौका मिला. इंटरव्यू के बाद उनका चयन हुआ और वह 10 दिनों के भीतर हैदराबाद शिफ्ट हो गईं. उसी दिन उन्हें सर्विस कंपनी की जॉइनिंग डेट का फोन भी मिला, लेकिन उन्होंने ओपनटेक्स्ट में ही आगे बढ़ने का फैसला किया.

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कुछ महीनों तक ओपनिंग नहीं आई. कई इंटरव्यू में रिजेक्शन मिला. सर्विस कंपनी ने दोबारा जॉइनिंग डेट भेज दी. उनके पास सिर्फ 15 दिन बचे थे. इसी दौरान उन्हें ओपनटेक्स्ट से फुल-टाइम ऑफर मिल गया.

सीखना जारी रहा

फुल-टाइम नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. उन्होंने डेटा साइंस और मशीन लर्निंग सीखी. नैनोडिग्री पूरा किया. लेकिन उन्हें महसूस हुआ कि उनकी असली रुचि अब भी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में है.

देखें पोस्ट

गूगल का पहला इंटरव्यू

2019 में गूगल ने पहली बार इंटरव्यू के लिए बुलाया. वह चयनित नहीं हुईं. लेकिन इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने तैयारी और मजबूत कर ली. उन्होंने कई और इंटरव्यू दिए. रिजेक्शन मिलते रहे, लेकिन हर बार वह कुछ नया सीखती गईं.2020 में वह सर्विसनाउ से जुड़ीं. यहां उन्होंने अनुशासन पर काम किया. उन्होंने रोज एक डीएसए सवाल हल करना शुरू किया. उन्होंने यह सिलसिला दो साल तक बिना रुके जारी रखा.

फिर आया गूगल का कॉल और बदल गई किस्मत

जून 2022 में गूगल ने दोबारा संपर्क किया. उन्होंने महीनों तैयारी की. इंटरव्यू अक्टूबर तक चले. फिर उन्हें वह मेल मिला जिसका वह लंबे समय से इंतजार कर रही थीं-'कांग्रेस्युलेशन्स, यू आर इन.' उन्हें गूगल में एल-4 इंजीनियर की पोजिशन मिल गई.

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‘न शॉर्टकट, न किस्मत,सिर्फ लगातार मेहनत’

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि टीयर-3 कॉलेज से गूगल तक पहुंचने में कोई शॉर्टकट नहीं था. सिर्फ लगातार मेहनत, विश्वास और हर दिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश थी.उनकी कहानी पर हजारों लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं.कमेंट्स में लोग लिख रहे हैं: आप सच में प्रेरणा हैं. आपकी मेहनत काबिल-ए-तारीफ है.

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