रील-वायरल की होड़ में टाइगर निशाने पर, सवाल-कौन किसके इलाके में?

रणथंभौर नेशनल पार्क से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें जंगल का राजा कहे जाने वाला टाइगर अपने ही इलाके में घिरा हुआ नजर आता है. कई सफारी जीपें उसे चारों तरफ से इस तरह घेर लेती हैं कि उसके पास आगे बढ़ने की जगह तक नहीं बचती.

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A tigress rests at the Pench Tiger Reserve in Nagpur. (Photo: PTI/File) A tigress rests at the Pench Tiger Reserve in Nagpur. (Photo: PTI/File)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:17 PM IST

सोशल मीडिया की होड़ में लोग अब जंगलों की सीमाएं लांघकर जानवरों की जगह में घुस रहे हैं. बाघों को घेरना, उनके बेहद करीब जाकर सेल्फी लेना और वायरल रील बनाने की चाहत अब आम हो गई है. वन्यजीव संरक्षण की बजाय 'वायरल होने' की इस दौड़ ने कई घटनाओं में बाघों को परेशान किया है और इंसान-वन्यजीव संघर्ष को बढ़ावा दिया है.

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ताजा मामला रणथंबौर में जीपों का घेराव का है.

इससे कुछ हफ्ते पहले रणथंबौर नेशनल पार्क में भी ऐसा ही मामला सामने आया. यहां सफारी जीपों ने एक बाघ को चारों तरफ से घेर लिया.पर्यटक इतने करीब पहुंच गए कि बाघ के पास घूमने की भी जगह नहीं बची. वीडियो वायरल होने के बाद जिम्मेदार पर्यटन  पर सवाल उठे. कई बार सफारी ड्राइवर और गाइड भी 'वायरल शॉट' के चक्कर में नियम तोड़ते नजर आए हैं.

लगातार बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं

देश के कई टाइगर रिजर्व में पर्यटक सुरक्षित दूरी बनाए रखने के बजाय बाघ के पास जाकर फोटो खिंचवाते देखे गए हैं. कुछ मामलों में लोग बाघ के शिकार या आराम के दौरान भी भीड़ लगा देते हैं.

मोबाइल फोन के कारण शोर और भीड़ दोनों बढ़ रहे हैं, जिससे जानवरों का प्राकृतिक व्यवहार प्रभावित हो रहा है. कई रिजर्व में अब सफारी के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने पर भी विचार किया जा रहा है.
 

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देखें वायरल वीडियो

 

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित Tadoba-Andhari Tiger Reserve के पास दुर्गापुर-मोहुर्ली रोड पर एक युवा बाघ आराम से सड़क पार कर रहा था. तभी राहगीरों और पर्यटकों ने अपनी गाड़ियां रोक दीं.

लोग गाड़ियों से उतरकर बाघ के बेहद करीब पहुंच गए और उसे चारों तरफ से घेर लिया. कई लोग मोबाइल निकालकर सेल्फी और वीडियो बनाने लगे, जबकि कुछ लोग बाघ के पीछे-पीछे चलते हुए उसे तंग करते नजर आए.

वीडियो में बाघ साफ तौर पर तनावग्रस्त दिख रहा था. वह रुक-रुककर आगे बढ़ रहा था, लेकिन इंसानों की भीड़ ने उसका रास्ता रोक रखा था. यह घटना 15-16 मार्च 2026 के आसपास की बताई जा रही है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई.वन्यजीव विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसी लापरवाही इंसान-वन्यजीव संघर्ष को और बढ़ा सकती है.
 

क्यों बढ़ रहा है इंसानों का दखल

इस घटना ने वाइल्डलाइफ टूरिज्म को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की भीड़ और घेराबंदी से टाइगर जैसे जानवरों का तनाव स्तर बढ़ सकता है. शरीर में कॉर्टिसोल बढ़ने से उनमें रक्षात्मक आक्रामकता की संभावना भी पैदा हो सकती है, जो इंसानों और जानवरों दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.

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भारत में टाइगर रिजर्वों में पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है. लोग दूर-दूर से बाघ देखने आते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर 'बेस्ट शॉट' और 'वायरल रील' की होड़ ने स्थिति बदल दी है.बफर जोन की सड़कें गांव और पर्यटकों दोनों के लिए इस्तेमाल होती हैं. जंगल बाघ का घर है, लेकिन इंसान उसे “फोटो स्पॉट” समझने लगे हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार तनाव देने से बाघ आक्रामक हो सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है. चंद्रपुर जैसे इलाकों में पहले भी बाघ के हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.

वन विभाग और विशेषज्ञों की अपील

वन विभाग ने ताडोबा घटना की जांच शुरू कर दी है और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कार्रवाई की बात कही है.

लोगों से अपील की गई है:

बाघ दिखे तो गाड़ी से बाहर न निकलें. कम से कम 50-100 मीटर की दूरी बनाए रखें. हॉर्न न बजाएं, शांत रहें.
गाड़ी के अंदर से ही फोटो या वीडियो लें.

वन्यजीव कार्यकर्ताओं का कहना है कि जंगल उनका घर है, हम सिर्फ मेहमान हैं. सेल्फी के चक्कर में हम न सिर्फ बाघों की सुरक्षा, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को खतरे में डाल रहे हैं. अगर यह सिलसिला नहीं रुका, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.

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