क्यों अपनी बाइक्स के आगे लोहे की रॉड लगवा रहे पाकिस्तानी? क्या है इसकी वजह

इन दिनों सोशल मीडिया पर पाकिस्तान से ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग बाइक के आगे रॉड फिक्स करवाते दिखाई दे रहे हैं. क्या यह कोई ट्रेंड या फिर लोग इसका सेल्फ स्टीक के तौर पर इस्तेमाल करेंगे या कुछ और? इस चीज को लेकर काफी चर्चा हो रही है. ऐसे में जानते हैं कि बाइक के आगे रॉड लगवाने का आखिर माजरा क्या है?

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पाकिस्तान में बाइक के आगे रॉड लगवाने वाले वीडियो खूब वायरल हो रहे (Photo - Instagram/@mr._.aliak) पाकिस्तान में बाइक के आगे रॉड लगवाने वाले वीडियो खूब वायरल हो रहे (Photo - Instagram/@mr._.aliak)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:08 PM IST

पाकिस्तान में मोटरसाइकिल और स्कूटरों के आगे रॉड लगवाने के वायरल वीडियो के बीच ये चर्चा हो रही है कि ये ट्रेंड आखिर है क्या? थोक के भाव में बाइक के आगे लोग रॉड या मेटल स्टीक लगाते नजर आ रहे हैं. इन वीडियो में बताया जा रहा है कि ये कोई ट्रेंड नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के लाहौर में वसंत की वापसी हो रही है. ऐसे में समझते हैं कि बसंत की वापसी क्या है और इसका बाइक के आगे मेटल स्टीक लगाने से क्या संबंध है. 

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पाकिस्तान के लाहौर में सर्दी खत्म होने और बसंत का मौसम शुरू होते ही बसंत उत्सव मनाने की परंपरा है. इस दौरान लोग घरों से बाहर निकलकर पतंग उड़ाते थे. पतंगबाजी इस त्यौहार का मुख्य आकर्षण होता था. लाहौर से बाहर रहने वाले लोग, यहां तक की जो विदेशों में रहते हैं, वो भी छुट्टियां लेकर इस उत्सव को मनाने घर पहुंचते थे. इस त्योहार को लेकर लोगों में वहां ईद से भी ज्यादा उत्साह होता था. लेकिन, पिछले कुछ दशकों से इस त्योहार पर बैन लग गया. 

गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2005 से बसंत मनाने पर रोक लगा दिया गया था. क्योंकि, इस दौरान पतंगबाजी से होने वाली दुर्घटनाए बढ़ने लगी थी. पतंग के मांझे से काफी लोग घायल होने लगे. यहां तक की कई जानें भी चली गईं. खासकर, सड़कों पर चलने वाले बाइक और साइकिल सवार कई लोगों की मांझा धागे की चपेट में आने से मौत हो गई थी. 

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इसके बाद से बसंत में पतंगबाजी पर बैन लगा दिया गया. जबकि, इस उत्सव का मुख्य आकर्षण ही पतंग उड़ाना होता था. इस दौरान और भी कई तरह के खेल, गीत-संगीत के कार्यक्रम आयोजित होते थे और पतंगबाजी इसकी प्रमुख गतिविधि होती थी. इसको लेकर प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती थी. 2005 में पतंगबाजी पर बैन के लिए अध्यादेश भी लाया गया था. 

अब लाहौर की इस परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को फिर से शुरू करने का फैसला सरकार ने लिया है. इसके लिए सुरक्षा के लिहाज से कई तरह के गाइड लाइन भी जारी किए गए हैं. खासकर, पतंगबाजी के लिए मांझा धागे या मेटल और कांच लेपित धारदार धागे के इस्तेमाल पर रोक लगा दिया गया है और पतंगबाजी के लिए परमिशन लेने का प्रावधान किया गया है. 

ऐसे में लोग व्यक्तिगत स्तर पर पतंगबाजी के दौरान दुर्घटना का शिकार होने से बचने के लिए बाइक के आगे मेटल की स्टीक लगवा रहे हैं, ताकि किसी भी तरह के हादसे को टाला जा सके. अगर किसी पतंग का धागा बाइक के सामने आए भी तो वो रॉड से टकराकर रुक जाए और राइडर को कोई नुकसान नहीं पहुंचे. 

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अब कुछ लोगों ने वायरल वीडियो के साथ ये भी दावा किया है कि लाहौर में सरकार फ्री में रॉड या मेटल स्टीक बाइक पर लगवा रही है. लेकिन, कहीं से ऐसी कोई पुष्टि नहीं होती है. हां, मैकेनिक के यहां या गैराजों में बाइक पर रॉड लगवाने के काफी वीडियो सोशल मीडिया पर दिखाई दे रहे हैं.   

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