'मम्मी बीमार हैं…’, 5 साल की बच्ची की गुहार सुन कंपनी ने बदल ली पॉलिसी

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक कर्मचारी से जुड़ी घटना सामने आई है. इस पोस्ट के वायरल होते ही लोगों ने अपने निजी अनुभव भी साझा किए, जिनमें वर्क फ्रॉम होम और पारिवारिक जिम्मेदारियों से जुड़ी कई भावुक और सच्ची कहानियां सामने आईं.

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बच्ची ने मासूमियत से कहा कि क्या आप मेरे पापा को घर से काम करने दे सकते हैं (Photo: AI Generated) बच्ची ने मासूमियत से कहा कि क्या आप मेरे पापा को घर से काम करने दे सकते हैं (Photo: AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:48 PM IST

ऑफिस की जिंदगी में काम करते-करते इंसान अक्सर उसमें इतना खो जाता है कि उसकी अपनी पहचान भी बदलने लगती है. जिंदगी डेडलाइन और परफॉर्मेंस तक सिमट जाती है. लेकिन कोई भी जॉब करने वाला व्यक्ति सिर्फ एक कर्मचारी नहीं होता.वह पति भी होता है, बेटा भी, मां भी, और उसके पास ऐसी जिम्मेदारियां भी होती हैं जो ऑफिस से अलग होती हैं.

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कई बार इंसान इस संतुलन को बना नहीं पाता, और नौकरी के टफ माहौल में वह अपनी परेशानी खुलकर कह भी नहीं पाता. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह कहानी भी एक ऐसे ही पिता की है, जो ऑफिस और निजी जिंदगी के बीच उलझकर खुद को संभाल नहीं पा रहा था.

यही कहानी एक मोड़ लेती है, जब बदलाव की शुरुआत एक पांच साल की बच्ची की मासूम आवाज से होती है. बच्ची ने अपने पिता के बॉस से फोन पर एक छोटा सा सवाल पूछ लिया.मामला उस वक्त का है जब एक कर्मचारी ने अपनी बीमार पत्नी की देखभाल के लिए कुछ समय तक घर से काम (WFH) करने की अनुमति मांगी. लेकिन कंपनी की पॉलिसी और टीमवर्क का हवाला देते हुए बॉस ने यह अनुरोध ठुकरा दिया. कर्मचारी के सामने दो मुश्किल रास्ते थे या तो नौकरी छोड़ दे या परिवार की जिम्मेदारी निभाए.

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इसी बीच एक दिन बॉस का फोन आया. उस समय कर्मचारी बाथरूम में थे, इसलिए उनकी पांच साल की बेटी ने फोन उठाया. बॉस ने कहा कि पापा से बात करवा दें, लेकिन बच्ची ने पहले खुद एक सवाल पूछने की इजाजत मांगी.


बॉस ने हामी भरी, तो बच्ची ने मासूमियत से कहा कि क्या आप मेरे पापा को घर से काम करने दे सकते हैं? ताकि वह मुझे स्कूल छोड़ सकें और मेरी मम्मी का ख्याल रख सकें. मैं उनकी बीमारी के बाद से स्कूल नहीं जा पाई हूं.


यह सुनकर बॉस कुछ पल के लिए खामोश हो गए और बिना कुछ कहे फोन काट दिया. कर्मचारी को इस बातचीत के बारे में कुछ पता नहीं था. बाद में जब उन्होंने आखिरी हिस्सा सुना, तो वह कुछ देर चुप रहे और धीरे से कहा, 'Not the hero I deserved, but the hero I needed.

यहीं से बदलाव की शुरुआत हुई.

इस घटना के अगले ही दिन कंपनी ने बड़ा फैसला लिया और अपनी पॉलिसी में बदलाव करते हुए सभी कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम का विकल्प शुरू कर दिया.जैसे ही यह कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई, लोगों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए. एक यूजर ने लिखा कि WFH सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत है, ताकि किसी को परिवार और नौकरी के बीच चुनाव न करना पड़े. वहीं, एक अन्य यूजर ने बताया कि कीमोथेरेपी के दौरान भी कई महिलाएं काम कर रही थीं और WFH ने उनकी मदद की.

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कुछ लोगों ने यह भी कहा कि कभी-कभी एक बच्चे का साधारण सवाल वह सच्चाई सामने ला देता है, जो नेतृत्व नहीं देख पाता. वहीं, एक अन्य टिप्पणी में कहा गया कि नीतियां अक्सर सिस्टम के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन एक सच्चा मानवीय पल हमें याद दिलाता है कि असल मायने क्या हैं.

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