दुकान में जॉब, कैब चलाई... अब अमेरिका में इस इंडियन का है करोड़ों का बिजनेस

मनी सिंह नाम का शख्स 2006 में 19 वर्ष की आयु में भारत के पंजाब से अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को गए थे. वह कभी 6 डॉलर प्रति घंटे की दर से वहां कैब चलाते थे. आज हर साल 2 मिलियन डॉलर यानी 17 करोड़ रुपये प्रति वर्ष कमाते हैं.

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भारत का मनी सिंह कैब ड्राइवर से ऐसे बन गया अमेरिका का बड़ा बिजनैस मैन (Photo - Instagram@dandiesbarber) भारत का मनी सिंह कैब ड्राइवर से ऐसे बन गया अमेरिका का बड़ा बिजनैस मैन (Photo - Instagram@dandiesbarber)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2025,
  • अपडेटेड 8:05 PM IST

भारत का एक शख्स 19 साल की उम्र में अमेरिका गया. उन्होंने ड्राइवर की नौकरी की, कैब चलाए. एक वक्त ऐसा भी था, जब अकेलेपन और बिना नौकरी के वह सबकुछ छोड़कर घर वापस आने की सोचने लगे थे. फिर कुछ नया करने की ठानी और आज वह शख्स अमेरिका में करोड़ों की बिजनेस अंपायर चला रहा है.  

सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मनी सिंह अब 38 साल के हो चुके हैं. अमेरिका पहुंचने पर घर से इतने दूर परिवार से अलग एकदम अकेले हो गए थे. उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया था कि मैं सबकुछ छोड़कर अमेरिका के वापस भारत जाना चाहता था. तब मैं एकदम अकेला था. फिर उनकी किस्मत ने करवट ली और एक कैब ड्राइवर अमेरिका में बड़ा बिजनेसमैन बन गया. 

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पढ़ाई छोड़कर दुकान में शुरू किया काम
उन्होंने बताया कि शुरुआत में बे एरिया में एक कॉलेज गए, लेकिन भारत में स्कूल के कुछ क्रेडिट ट्रांसफर न होने पर उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. उनकी मां ने उन्हें जल्दी से नौकरी ढूंढ़ने के लिए कहा. इसलिए उसने कुछ समय के लिए एक स्थानीय दवा की दुकान पर काम किया. फिर अपने चाचा की टैक्सी कंपनी में ड्राइवर के तौर पर लगभग 6 डॉलर प्रति घंटे की सैलरी वाली नौकरी शुरू की.

कैब चलाई और फिर  कैब सर्विस कंपनी शुरू कर दी
मनी सिंह ने 12 साल तक कैब चलाते रहे. पहले वह सिर्फ ड्राइविंग करते थे. फिर धीरे-धीरे कर पांच कैब खरीद लिये. उन्होंने अपनी स्वयं की कैब कंपनी शुरू की. फिर स्वतंत्र ड्राइवरों के लिए विज्ञापन, मार्केटिंग एजेंसी और ड्राइवर नेटवर्क की शुरुआत की.

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2018 में, सिंह ने तय किया कि उन्हें टैक्सियों से अलग कुछ करना होगा. इसलिए, ड्राइवर्स नेटवर्क, जिसे अब एटीसीएस प्लेटफॉर्म सॉल्यूशंस के नाम से जाना जाता है, चलाने के अलावा, उन्होंने जून 2019 में माउंटेन व्यू में एक स्थानीय नाई के साथ मिलकर डैंडीज बार्बरशॉप एंड बियर्ड स्टाइलिस्ट खोला.

ऐसे आया सैलून खोलने का आइडिया
उन्हें यह विचार उनकी पार्टनर जॉयप्रीत से मिला. उन्होंने उन्हें अपनी मां के नक्शेकदम पर चलने का सुझाव दिया - जो भारत में और बाद में उत्तरी कैलिफ़ोर्निया में हेयर सैलून चलाती थीं.पिछले साल डैंडीज़ की कमाई $1.07 मिलियन रही. 

दस्तावेज़ों से पता चलता है कि एटीसीएस प्लेटफ़ॉर्म सॉल्यूशंस ने $1.18 मिलियन का राजस्व अर्जित किया. डैंडीज में पूर्णकालिक रूप से काम करने वाले और एटीसीएस पर प्रति सप्ताह लगभग 20 घंटे बिताने वाले मनी सिंह कहते हैं कि दोनों ही व्यवसाय उनके लिए मुनाफे का सौदा साबित हुआ.

पहले मां के सैलून खोलने में की थी मदद
मनी सिंह बताते हैं कि कैब ड्राइवर से नाई की दुकान का मालिक बनना भले ही एक बड़ी छलांग लगे, लेकिन  इसके लिए उन्होंने सालों मेहनत करनी पड़ी. 2007 में अपनी मां को कॉस्मेटोलॉजी का लाइसेंस दिलाने और हेयर सैलून खोलने के लिए प्रेरित करने के बाद, उन्होंने उनकी दुकान चलाने, उसका विज्ञापन करने और उसकी मार्केटिंग में मदद की.

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उन्होंने बताया कि अपनी दुकान खोलने की प्रक्रिया काफी थकाऊ थी और उन्होंने टैक्सी चलाने और सामान भेजने से होने वाली बचत से 75,000 डॉलर की शुरुआती लागत खर्च कर दी.

मनी सिंह बताते हैं कि आपको अनुमति लेनी पड़ती है. आपको शहर से लेन-देन करना पड़ता है. मुझे दुकान खोलने का लाइसेंस लेने में ही पूरा एक साल लग गया, इसलिए दुकान खोलने से पहले मुझे एक साल का किराया देना पड़ा.

बार्बर शॉप चलाने का नहीं था अनुभव
मनी सिंह को बार्बर शॉप का कोई अनुभव नहीं था. इसलिए उन्होंने अपने एक नाई दोस्त के साथ मिलकर दुकान खोली. छह महीने बाद, कोविड-19 महामारी आ गई. उनके बिजनेस पार्टनर ने एक पारिवारिक मामले के चलते कंपनी छोड़ दी, इसलिए उन्होंने लगभग एक साल के लिए दुकान बंद कर दी, लेकिन किराया तो देना ही था. 

नए बिजनेस के लिए लेना पड़ा काफी कर्ज
मनी सिंह बताते हैं कि उन्हें लघु व्यवसाय प्रशासन से दो पेचेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम लोन मिले थे—एक 68,000 डॉलर का और दूसरा 18,000 डॉलर का. इसे बाद में माफ़ कर दिया गया. उन्होंने दो दोस्तों से20,000 डॉलर, अपने लाइफ इंश्योरेंस से 30,000 डॉल और क्रेडिट कार्ड से 80,000 डॉलर का कर्ज़ लिया.

सारे स्टॉक और इनवेस्टमेंट बेचने पड़े
मनी सिंह ने अपने स्टॉक पोर्टफोलियो को भी बेच दिया और खाने-पीने जैसी ज़रूरी चीज़ों पर कम खर्च किया. ताकि उनका व्यवसाय चलता रहे. उन्होंने कहा कि मुझे सब कुछ बेचना पड़ा. मुझे कम खाना पड़ा. मैं एक वक्त के खाने के लिए सिर्फ एक डॉलर खर्च करता था. 

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उस खाली समय में मनी सिंह ने हेयर स्टाइलिस्ट की ट्रेनिंग के लिए एक इंस्टिच्यूट में दाखिला लिया. ताकि 2021 में जब डैंडीज़ फिर से खुले, तो वह व्यक्तिगत सौंदर्य प्रसाधनों की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध करा सके. उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे हम लोगों से जुड़ते गए, जीवन के हर पहलू से जुड़े बहुत से लोग मेरे पास आने लगे.

अब चला रहे तीन सैलून और कैब सर्विस कंपनी
आज मनी सिंह के पास डैंडीज के तीन स्टोर हैं. 25 लोग काम करते हैं.  इनमें से 15 बार्बर हैं  और उन्हें हर महीने 7,000 डॉलर का वेतन मिलता है. इसमें डैंडीज से 3,000 डॉलर और एटीसीएस से 4,000 डॉलर शामिल हैं. मनी ने बताया कि उन्होंने अपना लाइफ इंश्योरेंस और क्रेडिट कार्ड का  लोन  चुका दिया है और अपने बचे हुए पीपीपी लोन को चुकाना शुरू कर दिया है.

मनी सिंह बताते हैं कि मुश्किल दौर में कर्ज लेकर कारोबार को जिंदा रखना और अपने खाने-पीने की चीजों में कटौती करके मैंने काफी मुश्किल दौर देखे. तब जाकर इस बिजनेस को खड़ा कर पाया. 

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