JCB से चूरमा बनते देखने पहुंचे लोग... कई क्विंटल में बनेगा और 4 लाख लोगों में बंटेगा! देखें वीडियो

कोटपूतली में भैरू बाबा के भंडारे में जेसीबी मशीन से 651 क्विंटल चूरमा बन रहा. इसका भैरू बाबा को भोग लगेगा. फिर 4 लाख लोगों के बीच इसका वितरण किया जाएगा. यहां राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व दिल्ली सहित देश के कोने-कोने से लोग पहुंचेंगे.

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यहां जेसीबी से बनाया जा रहा 651 क्विंटल चूरमा (Photo - ITG) यहां जेसीबी से बनाया जा रहा 651 क्विंटल चूरमा (Photo - ITG)

हिमांशु शर्मा

  • कोटपूतली,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:20 PM IST

राजस्थान के कोटपूतली बहरोड जिले में इन दोनों एक ऐसे मेले की तैयारी चल रही है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है. 30 जनवरी को अरावली के पहाड़ियों के बीच बने भैरू बाबा के मंदिर में 651 क्विंटल चूरमें का भोग लगाया जाएगा. इसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी है.

 जेसीबी मशीन से चूरमा मिलाने व बनाने का काम चल रहा है. साथ ही इस काम में थ्रेसर मशीन की मदद से चूरमे को पीस गया है. ट्रैक्टर, जेसीबी मशीन व ट्रक सहित अन्य मशीनों की मदद से चूरमा को मिलाने व एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम किया जा रहा है.

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कोटपूतली बहरोड जिले में प्रसिद्ध छापाला भैरूजी का मंदिर है. इसमें 17वें लक्की मेले का आयोजन चल रहा है. 30 जनवरी को लगने वाले इस मेले में राजस्थान के अलावा हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश सहित आसपास के राज्यों से लाखों श्रद्धालु भैरू बाबा के दर्शन के लिए आते हैं.

 इस मेले में इस बार चार लाख लोगों के लिए चूरमा बनाया जा रहा है. करीब 5000 से ज्यादा लोग रात दिन मिलकर इस प्रसाद को तैयार कर रहे हैं. इस महाप्रसाद को जेसीबी मशीन और थ्रेसर की मदद से तैयार किया जा रहा है. आटे की भाटियों की पिसाई के बाद उनको थ्रेसर मशीन में डालकर पिसा गया और उसके बाद चूरमें में देसी घी, मीठा, काजू, बादाम, किशमिश अन्य ड्राई फ्रूट्स डालकर उसको तैयार किया गया.

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इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ट्रैक्टर, ट्रक, डंपर व जेसीबी मशीन सहित कई तरह की मशीन लगाई गई.  आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रसाद बनाने में 100 मीटर क्षेत्र बाटी सेंकने के लिए आग लगाया गया है. इसमें 150 क्विंटल आटे से बनी बाटियों की सिंकाई की गई. जगरा (आग) जलाने के लिए 450 क्विंटल गोबर के उपलों का इस्तेमाल किया गया है.

चूरमा में मिलाए गए हैं इतने सारे ड्राईफ्रूट्स
चूरमा बनाने के लिए तैयार बाटियों में डेढ़ सौ क्विंटल आटा, 100 क्विंटल सूजी, 35 क्विंटल देसी घी, 130 क्विंटल मीठा का इस्तेमाल किया गया है. साथ ही 10 क्विंटल मावा, 30 क्विंटल बादाम, तीन क्विंटल काजू ,3 क्विंटल किशमिश, 100 क्विंटल दूध, आटे में मिलाया गया है. 80 क्विंटल दूध दही का इस्तेमाल भी किया गया. 

साथ ही दाल के लिए 40 क्विंटल दाल, 20 पीपे सरसों का तेल, 2 क्विंटल हरी मिर्च, 1 क्विंटल हरा धनिया, 60 किलो लाल मिर्च, 60 किलो हल्दी, 40 किलो जीरे का इस्तेमाल किया गया. यहां आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त पानी के लिए टैंकरों की व्यवस्था की गई है.

इस अनोखे मेले में भंडारे की चर्चा अब सोशल मीडिया से लेकर आम आदमी चौक चौराहे तक हो रही है। यह मंदिर खास है, कहते हैं या मांगी गई सभी मुरादे पूरी होती है. इसलिए इस मंदिर में होने वाला आयोजन भी सबसे खास होता है. शनिवार को विशाल कलश यात्रा का आयोजन किया जाएगा. हजारों की संख्या में महिलाएं इसमें शामिल होंगी. इस दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की जाएगी. साथ ही मेले के लिए खास सजावट की तैयारी की गई है. हजारों लोग वॉलिंटियर इसमें अपनी सेवा देंगे.

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