विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले हर छात्र के लिए यह खबर चौंकाने वाली है. यूनाइटेड किंगडम के किंग्स्टन यूनिवर्सिटी से डिजिटल मीडिया टेक्नोलॉजी में क्लास टॉपर रहे 21 साल के खालिद शरीफ की कहानी इन दिनों वायरल है. उन्होंने अपनी डिग्री पर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा (लगभग 100,000 पाउंड या 125,000 डॉलर) खर्च किए, लेकिन ग्रेजुएशन के बाद 500 से ज्यादा नौकरियों के लिए आवेदन करने के बावजूद उन्हें अब तक कोई नौकरी नहीं मिली है.
खालिद ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि वह अपनी क्लास में टॉप थे, इसके बावजूद उन्हें 20 से भी कम इंटरव्यू कॉल मिले और एक भी जॉब ऑफर नहीं आया. उनका कहना है कि सिस्टम पूरी तरह से खराब हो चुका है. उन्होंने अपनी फील्ड के अलावा सेल्स और अन्य क्षेत्रों में भी आवेदन किया, लेकिन बाजार इतना भरा हुआ है कि अच्छे छात्रों को भी मौका नहीं मिल रहा. खालिद के मुताबिक, यह स्थिति बेहद तनावपूर्ण है.
खालिद मूल रूप से मिस्र के रहने वाले हैं और एक मिडिल क्लास परिवार से आते हैं. उन्होंने काफी मेहनत और पैसे जुटाकर अपनी पढ़ाई पूरी की थी. उन्हें उम्मीद थी कि इस डिग्री के सहारे उन्हें यूके में नौकरी मिलेगी और उनकी जिंदगी बदल जाएगी, लेकिन अब उन्हें लगता है कि शायद उन्हें वापस मिस्र लौटना पड़े, क्योंकि फिलहाल उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है.
AI ने ले ली अब फ्रेशर की जगह
खालिद शरीफ ने 2025 में ग्रेजुएशन के बाद अपने क्षेत्र से जुड़े कामों के लिए आवेदन करना शुरू किया. उन्होंने बताया कि 500 आवेदन करने के बावजूद उन्हें सिर्फ 10 से 20 इंटरव्यू के मौके मिले. कई बार उन्होंने शुरुआती राउंड भी पार किए, लेकिन अंतिम चरण में उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि कंपनी किसी दूसरे उम्मीदवार को चुन रही है.
खालिद का मानना है कि समस्या उनकी डिग्री में नहीं, बल्कि जॉब मार्केट में है. उनके अनुसार, इस समय बाजार में प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा बढ़ गई है. बड़ी संख्या में ग्रेजुएट्स नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं, जिससे अवसर कम पड़ रहे हैं. कोविड के बाद और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंपनियां भर्ती करने से बच रही हैं और खर्च कम करना चाहती हैं.
AI के दौर में डिग्री का कोई महत्व नहीं!
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के दौर में केवल बड़ी डिग्री का महत्व कम होता जा रहा है. अब कंपनियां स्किल पर ज्यादा ध्यान देती हैं. कई ऐसे काम, जिन्हें करने में वर्षों की पढ़ाई लगती थी, अब एआई कम समय में कर सकता है. ऐसे में कंपनियां लागत कम करने के लिए एआई को प्राथमिकता दे रही हैं.
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